स्वातंत्र्य समर

futuredहमारे नायक

लाहौर षडयंत्र और बलवंत सिंह का अमर बलिदान

जालंधर और उसके आसपास आर्यसमाज भी अपने प्रवचनों से स्वत्व एवं सांस्कृतिक भाव जगा रही थी। ऐसे वातावरण में बलवंत सिंह का बचपन बीता था। इसलिए अंग्रेज द्वारा भारतीयों का दमन करने में सहभागी होना उन्हें स्वीकार नहीं था। उनके एक भाई रंगा सिंह क्राँतिकारी गतिविधियों से जुड़ गये थे। अब यह भाई की प्रेरणा हो उनकी या उनकी अपनी अंतरात्मा की आवाज।

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futuredविश्व वार्ता

अंग्रेजों से भारत की मुक्ति के लिए सैन्य अभियान की शुरुआत 4 जुलाई 1942 को

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नेताजी सुभाषचन्द्र बोस ने अंग्रेजों से भारत की मुक्ति के लिये सैन्य संघर्ष आरंभ किया

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futuredसमाज

दोहरा आजीवन कारावास, सर्वाधिक प्रताड़ना झेलने वाले वीर सावरकर

यदि तेल निकालने की मात्रा कम हो तो पिटाई होती थी। भोजन नहीं दिया जाता था। उसी जेल में उनके भाई भी थे पर दोनों भाई एक दूसरे से मिलना तो दूर देख भी नहीं सकते थे। पूरी जेल में सावरकर जी एकमात्र ऐसे कैदी थे, जिनके गले में अंग्रेजों ने एक पट्टी लटका रखी थी। इस पर “D” लिखा था । “D” अर्थात डेंजरस। यातनाएँ देने का यह चक्र चला लगभग ग्यारह वर्ष चला।

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futuredमनकही

मृत क्रांतिकारी के सिर को काटकर अदालत में प्रस्तुत किया : अंग्रेजों की क्रूरता की पराकाष्ठा

सुप्रसिद्ध क्रान्तिकारी प्रफुल्ल चाकी का जन्म 10 दिसंबर, 1888 को हुआ था। जब वे दो वर्ष के थे तभी उनके

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