स्वतंत्रता संग्राम

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1857 का क्रूर प्रतिशोध: जब अंग्रेजों ने सिपाही विद्रोह के जवाब में जलाया कानपुर

1857 की क्रांति के दौरान कानपुर और बिठूर में जनरल हैवलॉक और नील द्वारा किए गए नरसंहार की क्रूर गाथा, जब हज़ारों निर्दोष भारतीयों को मौत के घाट उतारा गया और गांव के गांव जला दिए गए।

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लक्ष्मीबाई केलकर : राष्ट्र निर्माण में नारीशक्ति जागरण की अग्रदूत

लक्ष्मीबाई केलकर, राष्ट्र सेविका समिति की संस्थापक, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और नारी जागरण की अग्रदूत थीं। उन्होंने स्त्रियों को सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्र सेवा में संगठित कर भारत के उत्थान में अमूल्य योगदान दिया। यह लेख उनके जीवन, कार्य और विचारधारा पर विस्तृत प्रकाश डालता है।

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भारतीय स्वाभिमान, स्वाधीनता और संस्कृति की प्रतीक : वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई

स्वाभिमान, स्वाधीनता और संस्कृति की रक्षा के लिये भारत में असंख्य बलिदान हुए हैं, तब जाकर हमने 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता का सूर्योदय देखा। इन बलिदानों में रानी लक्ष्मीबाई का अनूठा बलिदान भी है, जिन्होंने अपनी अंतिम श्वास तक संघर्ष किया।

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क्रांतिकारी नानक भील का बलिदान: अंग्रेजों की गोली सीने पर खाकर दिया किसानों की आवाज को नया जीवन

13 जून 1923 को डाबी में अंग्रेजों की गोली से शहीद हुए नानक भील ने किसान शोषण के खिलाफ आंदोलन चलाया और वनवासी समाज को जागरूक किया।

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सिर्फ़ तीस साल की उम्र में शहीद हो गए रामप्रसाद आज महान योद्धा, अमर शहीद की जयंती

यह आलेख अमर शहीद रामप्रसाद बिस्मिल की जयंती पर उनके क्रांतिकारी जीवन, साहित्यिक योगदान और शहादत की स्मृति को समर्पित है।

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futuredसाहित्य

बंगला भाषी प्रदेश में जन्मी हिन्दी पत्रकारिता : हिन्दी पत्रकारिता की यात्रा

नारद जयंती के दिन आया उदन्त मार्तण्ड यानी उगता हुआ सूरज वह नारद जयंती का दिन था। हम भारतीय लोग अपने पौराणिक आख्यानों के अनुसार देवर्षि नारद को दुनिया का पहला पत्रकार मानते हैं,

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