कालिदास से निराला तक साहित्य में बसंत पंचमी की यात्रा
बसंत पंचमी भारतीय साहित्य में केवल एक पर्व नहीं, बल्कि जीवन, प्रेम, भक्ति और ज्ञान का सांस्कृतिक उत्सव है।भारतीय काव्य परंपरा में बसंत की भूमिका को समझने का एक समृद्ध प्रयास।
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Read Moreशरद पूर्णिमा भारतीय संस्कृति का विशेष पर्व है। इस दिन चंद्रमा सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है। मां लक्ष्मी की पूजा, रात्रि जागरण, खीर की परंपरा और चंद्रकिरणों का वैज्ञानिक महत्व इसे अद्वितीय बनाता है।
Read Moreअंतरराष्ट्रीय अनुवाद दिवस 30 सितंबर को मनाया जाता है, जो अनुवादकों और भाषाई विशेषज्ञों को सम्मानित करता है। यह दिवस भाषाओं की दीवारें तोड़कर सांस्कृतिक आदान-प्रदान, शांति और मानव सभ्यता को जोड़ने का प्रतीक है।
Read More5 सितंबर को मनाया जाने वाला शिक्षक दिवस डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती का स्मरण है। यह दिन समाज निर्माण में शिक्षकों की भूमिका, उनकी चुनौतियों और आधुनिक शिक्षा में उनकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डालता है।
Read More‘लोकगीत’ धरती, पर्वत, फसलों, नदियों का राग है, प्रकृति की उन्मुक्त आवाज़ है जो उत्सवों, मेलों और त्योहारों में लोक समूहों के मधुर कंठों से गुंजारित होकर कानो में रस घोलती है। साहित्य की छंदबद्धता एवं अलंकारों से मुक्त रहकर ये मानवीय संवेदनाओं के संवाहक के रूप में माधुर्य प्रवाहित कर हमें तन्मयता के लोक में पहुँचा देते हैं।
Read Moreबात उस समय की है जब हम नागपुर आए थे। नई जगह, नए लोग और अलग भाषा। सबकुछ अलग सा
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