पौराणिक एवं वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है नवरात्र
नवरात्र का पौराणिक, आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व—महिषासुर वध से लेकर नवऊर्जा, उपवास और भारतीय कालचक्र तक का विस्तृत विश्लेषण।
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Read Moreनवरात्र की पौराणिक कथा, महिषासुर वध, शक्ति के नौ रूप, वैज्ञानिक दृष्टि और आयुर्वेदिक महत्व का समग्र वर्णन।
Read Moreछत्तीसगढ़ में शक्ति की उपासना प्रमुख रुप से की जाती है क्योंकि यहाँ का जनमानस इस बात को जानता है कि शक्ति के बिना सृष्टि की उत्पत्ति और विकास तथा सृष्टि के विनाश तक की कल्पना नहीं की जा सकती है। शाक्त परम्परा से संबंधित प्रमाण हमें यहां की मृण्यमयी मूर्तिकला, शिल्प, साहित्य, संस्कृति और जीवन शैली में सहज ही देखे जा सकते हैं।
Read Moreचैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से हिन्दू नववर्ष या नव संवत्सर का आरंभ होता है ।जिसे भारत के विभिन्न राज्यों में जैसे महाराष्ट्र में गुड़ीपड़वा, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, और कर्नाटक में उगादि, जम्मू कश्मीर में नवरेह तथा मणिपुर में साजिबु नोंगमा पंबा के नाम से जाना जाता है।
Read Moreनवरात्रि को कृषि और ऋतु परिवर्तन के संदर्भ में भी देखा जाता है। यह समय फसल की कटाई और नई फसल की बुवाई का होता है। शारदीय नवरात्रि विशेष रूप से शरद ऋतु की शुरुआत का प्रतीक है, जब मौसम बदलता है और धरती पर नई ऊर्जा का संचार होता है।
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