भारतीय संस्कृति

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आंवला नवमी पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने की आंवला वृक्ष की पूजा, प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि की कामना की

आंवला नवमी के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने धर्मपत्नी कौशल्या साय के साथ आंवला वृक्ष की पूजा कर प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की। उन्होंने कहा कि आंवला वृक्ष भारतीय संस्कृति में औषधीय और आध्यात्मिक महत्व रखता है तथा वृक्षों का संरक्षण हर नागरिक का कर्तव्य है।

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गुजरात की धरती पर बस्तर का मान बढ़ा — एकता परेड में छत्तीसगढ़ की झांकी बनी आकर्षण का केंद्र

गुजरात के एकता नगर में सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती पर आयोजित एकता परेड में छत्तीसगढ़ की झांकी “बस्तर की धरती – संस्कृति, सृजन और प्रगति की गाथा” ने सबका मन मोह लिया। झांकी ने जनजातीय जीवन, लोक परंपराओं और विकास की नई तस्वीर पेश करते हुए यह संदेश दिया कि बस्तर अब परंपरा और प्रगति का संतुलित प्रतीक बन चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने झांकी की सराहना की और इसे भारत की एकता और विविधता का जीवंत उदाहरण बताया।

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भाई दूज की अनकही कहानी : यम-यमुना से आज तक

भाई दूज का पर्व भाई-बहन के अटूट स्नेह, विश्वास और प्रेम का प्रतीक है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं, और परिवार में प्रेम का उजाला फैलता है।

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आत्मा का आलोक और आत्मदीपो भवः का संदेश दीपावली

दीपावली केवल प्रकाश का नहीं, आत्मा के जागरण और आत्मज्ञान का पर्व है। यह सनातन परंपरा में आत्मदीपो भवः — अपना दीप स्वयं बनने का संदेश देता है। जानिए दीपोत्सव के आध्यात्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक आयाम।

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भारतीय संस्कृति और गौरक्षा के अमर प्रहरी : स्वामी रामचंद्र वीर

स्वामी रामचंद्र वीर जी भारतीय संस्कृति, धर्म और गौरक्षा आंदोलन के अमर प्रहरी थे। उन्होंने राष्ट्र, संस्कृति और गौमाता की रक्षा के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित किया।

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स्वतंत्रता संग्राम से गौरक्षा आंदोलन तक संस्कृति जागरण के प्रतीक : संत प्रभुदत्त ब्रह्मचारी

संत प्रभुदत्त ब्रह्मचारी जी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के योद्धा, गौरक्षा आंदोलन के अग्रदूत और भारतीय संस्कृति के पुनर्जागरण के प्रतीक थे। उन्होंने समाज को संकीर्तन, साधना और साहित्य से नई दिशा दी।

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