बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय

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भारत की आत्मा का स्वर और राष्ट्र चेतना का गीत वन्दे मातरम्

बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा 7 नवम्बर 1875 को रचित “वन्दे मातरम्” राष्ट्रगीत भारतीय संस्कृति, मातृभूमि के प्रति भक्ति और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है। यह गीत आज भी भारत की आत्मा का ओजस्वी स्वर बना हुआ है।

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राष्ट्र की आत्मा का अमर गीत वन्दे मातरम्

वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की स्वतंत्रता चेतना का प्रतीक है। बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की कलम से निकला यह राष्ट्रगीत स्वाधीनता संग्राम के दौरान जन-जन की आवाज बना। शताब्दी वर्ष पर यह गीत आज भी भारत के सांस्कृतिक गौरव, एकता और मातृभूमि-भक्ति का प्रतीक है।

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