भारतीय संस्कृति का जीवन दर्शन : सतयुग से कलियुग तक समरसता, संगठन और एकात्म का संदेश
सतयुग से कलियुग तक भारतीय संस्कृति के जीवन दर्शन, समरसता, संगठन, एकात्म भाव और वैश्विक शांति में इसकी भूमिका पर आधारित विचारपूर्ण आलेख।
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Read Moreमानव जीवन में ईश्वर की अवधारणा सदियों से रही है, परंतु इसका वास्तविक स्वरूप क्या है? यह आलेख इस गहन प्रश्न पर एक नवीन दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। यहाँ हम यह समझने का प्रयास करेंगे कि ईश्वर कोई बाहरी सत्ता नहीं, बल्कि हमारे भीतर निहित शक्ति का प्रतिबिंब है।
Read Moreहमें यह भी नहीं भूलना चाहिए- ‘ धर्मो रक्षति रक्षितः। ‘ हम धर्म की रक्षा करेंगे तो धर्म भी हमारी रक्षा करेगा। धर्म के अन्तर्गत व्यक्ति का शरीर, परिवार, समाज, राष्ट्र, विश्व, चराचर जगत् और विश्व चेतना का समावेश है। हम शरीर धर्म की पालना करेंगे तो शरीर हमारी रक्षा करेगा। परिवार धर्म के पालन से परिवार हमारी रक्षा करेगा।
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