नींव हूँ बुनियाद हूं

नींव हूँ बुनियाद हूं
हां मैं ही विकास हूं।
बाग में उद्यान में
संसद के हर मुकाम में
श्रमित धरोहर हूँ।
हां मैं मजदूर हूं।

मेरे घर भगवान आये
उनको भोजन परोसा था।
था भरम मन का मेरे
सियासत का मौका था।

धुंआ मेरे अन्तस् में
गरल रोज पीता हूं।
जिस भवन को निर्माण किया
देख उसको रोता हूं।

असीम मुझमे संभावना
मुझसे ही नवनिर्माण है।
व्यापक मेरी मुफलिसी
दु:खों का विस्तार है।

विकास की इबारत मैंने लिखी
पर प्रकाश से बहुत दूर हूँ
हां मैं मजदूर हूं
हालत से मजबूर हूं।।

 

अविनाश तिवारी (अवि)
अमोरा
जांजगीर चाम्पा
8224043737