futuredखबर राज्यों सेताजा खबरें

महाराष्ट्र में ‘धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 2026’ पारित, जबरन धर्म परिवर्तन पर कड़े प्रावधान लागू

महाराष्ट्र विधानसभा ने 17 मार्च को ‘महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 2026’ को पारित कर दिया है। इस कानून के लागू होने के साथ ही राज्य उन राज्यों की सूची में शामिल हो गया है, जहां जबरन धर्म परिवर्तन को रोकने के लिए विशेष कानून बनाए गए हैं।

जबरन धर्म परिवर्तन पर सख्त सजा

नए कानून के तहत लालच, दबाव, धोखे, प्रलोभन, विवाह या अन्य अनुचित माध्यमों से किए गए धर्म परिवर्तन को अपराध माना गया है। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर 7 साल तक की सजा और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

यदि पीड़ित महिला, नाबालिग, अनुसूचित जाति/जनजाति से हो या सामूहिक धर्म परिवर्तन का मामला हो, तो जुर्माना बढ़कर 5 लाख रुपये तक और सजा भी सख्त हो सकती है। बार-बार अपराध करने वालों के लिए 10 साल तक की सजा और 7 लाख रुपये तक का जुर्माना तय किया गया है।

पुलिस को स्वतः कार्रवाई का अधिकार

इस कानून की खास बात यह है कि पुलिस को बिना शिकायत के भी (सुओ मोटू) कार्रवाई करने का अधिकार दिया गया है। पहले जहां केवल पीड़ित या उसके परिजन शिकायत कर सकते थे, अब पुलिस स्वयं संज्ञान लेकर जांच शुरू कर सकती है।

See also  जशपुर में महावीर प्रसाद जैन को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दी श्रद्धांजलि

धर्म परिवर्तन से जुड़े विवाह अमान्य

कानून में यह भी प्रावधान है कि यदि कोई विवाह केवल धर्म परिवर्तन के उद्देश्य से किया गया है, तो उसे अदालत द्वारा अवैध घोषित किया जा सकता है। ऐसे मामलों में जन्मे बच्चों को मां का धर्म माना जाएगा, लेकिन उन्हें दोनों माता-पिता से संपत्ति में अधिकार मिलेगा। साथ ही बच्चों की देखभाल और भरण-पोषण की जिम्मेदारी भी तय की गई है।

धर्म परिवर्तन से पहले 60 दिन की सूचना अनिवार्य

कानून के अनुसार, धर्म परिवर्तन से पहले संबंधित व्यक्ति या संस्था को 60 दिन पहले प्रशासन को सूचना देनी होगी। इस सूचना को सार्वजनिक किया जाएगा, ताकि कोई आपत्ति हो तो उसकी जांच की जा सके।

धर्म परिवर्तन के बाद 21 दिन के भीतर भी संबंधित जानकारी देना अनिवार्य होगा, अन्यथा परिवर्तन को अवैध माना जाएगा।

देशभर में बढ़ते ऐसे कानूनों की कड़ी

महाराष्ट्र का यह कानून देश में पहले से लागू ओडिशा, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, हरियाणा और राजस्थान जैसे राज्यों के कानूनों की तर्ज पर बनाया गया है। हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार, महाराष्ट्र का कानून अपने सख्त प्रावधानों और प्रक्रिया के कारण नई पीढ़ी के कड़े कानूनों में शामिल माना जा रहा है।

See also  जल जीवन मिशन 2.0 के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर, छत्तीसगढ़ में ग्रामीण जल आपूर्ति को मिलेगी मजबूती

संवैधानिक बहस भी जारी

इस तरह के कानूनों को लेकर संवैधानिक बहस भी जारी है। सुप्रीम कोर्ट पहले ही ऐसे कई मामलों की सुनवाई कर रहा है, जिनमें निजता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का मुद्दा उठाया गया है। माना जा रहा है कि महाराष्ट्र का यह नया कानून भी न्यायिक जांच के दायरे में आ सकता है।

कुल मिलाकर, राज्य सरकार का कहना है कि यह कानून जबरन धर्म परिवर्तन पर रोक लगाने और सामाजिक संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है, जबकि इसके प्रावधानों को लेकर कानूनी और सामाजिक स्तर पर बहस जारी है।