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छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जाँच नये सिरे से होगी

रायपुर, 10 अप्रैल प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार को छत्तीसगढ़ के शराब घोटाले की नए सिरे से जांच करने के लिए एक नया मामला दर्ज किया है। सोमवार को ही सुप्रीम कोर्ट ने मामले में मनी लांड्रिंग (धन शोधन) की कार्यवाही को यह कहते हुए रद्द कर दिया था कि एजेंसी के लिए धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत आगे बढ़ने के लिए कोई अनुसूचित अपराध स्थापित नहीं हुआ था।

वित्तीय अपराधों की जांच के लिए एजेंसी ने मंगलवार सुबह एक ईसीआईआर (प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट) दायर किया है। जो एफआईआर के समकक्ष होता है। यह छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा 17 जनवरी को दर्ज की गई एफआईआर पर आधारित है। इसमें आईएस (रिटायर्ड) अधिकारी अनिल टुटेजा उनके बेटे यश टुटेजा, कई कांग्रेस नेताओं, नौकरशाहों और व्यापारियों सहित 70 लोगों को 2,000 करोड़ रुपये के कथित भ्रष्टाचार में नामजद किया गया था।

एजेंसी के एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया, हमने छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में एक नया मामला दर्ज किया है, ताकि बड़ी साजिश की नए सिरे से जांच की जा सके। छत्तीसगढ़ पुलिस की एफआईआर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज की गई है, जो ईडी के लिए जांच आगे बढ़ाने उचित अपराध की श्रेणी में आता है।

अधिकारी ने कहा कि पीएमएलए के तहत नया मामला दर्ज होने से हमें पिछले एक साल में शराब घोटाले की जांच में मिली सफलता को जारी रखने में मदद मिलेगी। पुलिस एफआईआर विधानसभा चुनावों में भाजपा द्वारा राज्य में कांग्रेस को सत्ता से बेदखल किए जाने के लगभग एक महीने बाद दर्ज की गई।

छत्तीसगढ़ पुलिस ने इस मामले में ईडी के संदर्भ पर कार्रवाई की, जिसने चुनावों के बाद स्थानीय पुलिस को एक विस्तृत जांच रिपोर्ट भेजी। यह स्पष्ट नहीं है कि यह रिपोर्ट कब अधिकारी ने भी कहा, भेजी गई। यह पहली बार नहीं है कि ईडी ने मामला दर्ज करने के लिए इस तरह का रास्ता अपनाया है। लेकिन घटनाओं का एक ऐसा ही क्रम वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लंबित याचिकाओं के एक समूह का हिस्सा है। सुप्रीम कोर्ट में इस समय कई याचिकाएँ लंबित हैं।
ईडी का नया मामला एजेंसी को अपनी जाँच फिर से शुरू करने की अनुमति दे सकता है, क्योंकि सोमवार को शीर्ष अदालत ने मूल पीएमएलए जाँच को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि अपराध की पुष्टि नहीं हुई है। चूँकि कोई अनुसूचित अपराध नहीं है,

जैसा कि उपरोक्त निर्णय (पवना डिब्बर मामले के संदर्भ में) में कहा गया है, इसलिए अपराध की कोई आय नहीं हो सकती… यदि अपराध की कोई आय नहीं है, तो जाहिर है कि पीएमएलए की धारा 3 के तहत अपराध नहीं बनता है, न्यायमूर्ति अभय एस ओका और उज्वल भुयान की पीठ ने कहा।

पीठ ने कहा कि ईडी आयकर उल्लंघन के आधार पर आगे नहीं बढ़ सकता क्योंकि उन अपराधों को पीएमएलए के तहत अनुसूचित के रूप में वर्गीकृत नहीं किया गया है। डिब्बर के फैसले में, अदालत ने घोषणा की कि आपराधिक साजिश को पीएमएलए के तहत तभी आरोपित किया जा सकता है जब यह सूचीबद्ध अनुसूचित अपराध से संबंधित हो। पीएमएलए में विशिष्ट अपराधों को शामिल किया गया है, जिसमें भारतीय दंड संहिता (भादवि), नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम और सीमा पार निहितार्थ वाले अन्य अपराध शामिल हैं। यह विवाद मूल रूप से छत्तीसगढ़ के शराब उद्योग में भ्रष्टाचार के आरोपों से उत्पन्न हुआ, जिसमें अधिकारियों और प्रभावशाली पदाधिकारियों को शामिल किया गया। ईडी ने आरोप लगाया कि 2019 और 2022 के बीच अनियमितताएँ थीं।

जब सरकारी शराब रिटेलर सीएसएमसीएल के अधिकारियों ने डिस्टिलर से रिश्वत ली थी। तत्कालीन कांग्रेस के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर अपने नेताओं को निशाना बनाने के लिए ईडी का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था। केंद्र ने ईडी की कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि यह कानून का पालन है।

सरकार बदलने के बाद राज्य पुलिस ने एक नई एफआईआर दर्ज की, जिसमें तत्कालीन आबकारी कवासी लखमा, आबकारी विभाग के पूर्व विशेष सचिव और आबकारी निगम के एमडी अरुण पति त्रिपाठी, पूर्व मुख्य सचिव विवेक ढांढ और कांग्रेस नेता अनवर ढेवर का भी नाम शामिल है। एफआईआर में अनुमान लगाया गया है कि कथित मामले में संदिग्धों के अलावा लगभग 2,161 करोड़ रुपये की अपराध आय (पीओसी) अर्जित की गई थी। मामले में संघीय एजेंसी की नवीनतम ईसीआईआर का मतलब है कि अब वह उन सभी लोगों को पूछताछ के लिए फिर से बुला सकती है।