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कवि व रंगकर्मी योगेंद्र देवांगन के व्यक्तित्व व कृतित्व पर चर्चा व संक्षिप्त काव्य गोष्ठी

(शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर हुआ आयोजन)

(लाला जगदलपुरी स्मृति साहित्य एवं संस्कृति शोध संस्थान और हिंदी साहित्य भारती जिला इकाई कोंडागांव का  आयोजन)

शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर दिनांक 4 सितम्बर दिन शनिवार को दोपहर 2 बजे पेंशनर्स भवन कोंडागांव में लाला जगदलपुरी स्मृति साहित्य एवं संस्कृति शोध संस्थान और हिंदी साहित्य भारती जिला इकाई कोंडागांव के संयुक्त तत्वावधान में कवि व रंगकर्मी योगेंद्र देवांगन के व्यक्तित्व व कृतित्व पर चर्चा तथा संक्षिप्त काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि कवि योगेंद्र देवांगन की धर्मपत्नी मधुलिका देवांगन थीं।कार्यक्रम की अध्यक्षता हिंदी साहित्य भारती जिला कोंडागांव के अध्यक्ष उमेश मंडावी ने की विशिष्ट  आमंत्रित अतिथि  वरिष्ठ शिक्षक व कवि घनश्याम नाग थे। कार्यक्रम का संचालन कवियित्री मधु तिवारी ने किया।

सर्वप्रथम आमंत्रित अतिथियों व साहित्यकारों द्वारा कवि व रंगकर्मी योगेंद्र देवांगन के छाया चित्र पर दिप प्रज्ज्वलन व माल्यर्पण किया गया। कार्यक्रम के प्रथम भाग में पुरखा के सूरता कार्यक्रम अंतर्गत  कवि व रंगकर्मी योगेन्द्र देवांगन के व्यक्तित्व व कृतित्व पर चर्चा हुईं जिसकी शुरूआत  वरिष्ठ साहित्यकार हरेंद्र यादव ने की उन्होंने कवि योगेंद्र देवांगन को बेहद अनुशासित शिक्षक एक समर्पित रंगकर्मी  व दार्शनिक कवि बताया।

साहित्यकार यशवंत गौतम ने भी अपने संस्मरण सुनाए तथा उनकी लोकप्रिय हल्बी कविता सुनाई। जिसका हिंदी अनुवाद  योगेंद्र देवांगन के पौत्र तन्मय देवांगन ने किया तथा अपने दादा को श्रद्धांजलि दी। साहित्यकार हरिहर वैष्णव ने  अपने गुरु कवि व रंगकर्मी योगेंद्र देवांगन के   कला साहित्य व शिक्षक जीवन   पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए उनसे जुड़ी अपनी  यादों को साझा किया तथा उन्होंने योगेंद्र देवांगन को  दार्शनिक कवि एवं कला के प्रति  समर्पित अनुशासन प्रिय कलाकार बताया।

वरिष्ठ साहित्यकार सुरेंद्र रावल ने अपने बाल सखा योगेंद्र देवांगन को याद करते हुए अपनी यादो को सन्देश के माध्यम से भेजा जिसे उमेश मंडावी ने पढ़कर सुनाया। हिंदी साहित्य भारती के महामंत्री बृजेश तिवारी ने लाला जगदलपुरी स्मृति साहित्य व संस्कृति शोध संस्थान व हिंदी साहित्य भारती जिला इकाई कोंडागांव  से सम्बंधित विभिन्न जानकारियों को साझा किया तथा  योगेंद्र देवांगन को एक अच्छा रंगकर्मी व  सह्रदय कवि बताया।

वरिष्ठ साहित्यकार महेश पांडे ने पुरखा के सुरता अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम की प्रशंसा की तथा योगेंद्र देवांगन को याद कर उन्हें अपनी श्रद्धांजलि  दी। साहित्यकार घनश्याम नाग ने भी अपने संस्मरण सुनाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। मुख्य अतिथि मधुलिका देवांगन ने भी अपनी यादे साझा की।

कार्यक्रम के दूसरे भाग में शिक्षक दिवस पर काव्य पाठ किया गया जिसमें सर्वप्रथम गौतम राम साहू ने अपनी हल्बी व हिंदी कविताओं  की रिकॉर्डिंग सुनाई जिसे स्कूल के बच्चों ने स्वर दिया था। ततपश्चात हरेंद्र यादव ने वृद्ध आश्रम पर केंद्रित मार्मिक रचना सुनाकर वाहवाही बटोरी।  कवि लोकनाथ राठौर ने  छत्तीसगढ़ी गीत  सुनाया।

साहित्यकार हरिहर वैष्णव ने  अपने  प्रेरणादायक आह्वान गीत के कुछ अंश  सुनाये। कवि  यशवंत गौतम ने अपनी हल्बी कविता से आज के गाँव की यथार्थ तस्वीर पेश कर तालिया बटोरी। कवि घनश्याम नाग ने शिक्षा के वर्तमान स्वरूप  पर केंद्रित अपनी  कविता सुनाई।

हास्य व्यंगकार उमेश मंडावी ने  नेताओ और आज की राजनीति पर  अपनी ताज़ातरीन व्यंग्य  कविता सुनाई । कार्यक्रम का  संचालन कर रही मधु तिवारी ने शिक्षक दिवस पर  शिक्षकों को समर्पित  गीत सुनाया।  हिंदी साहित्य भारती के महामंत्री बृजेश तिवारी ने कार्यक्रम  के सफल आयोजन के लिए कार्यक्रम में उपस्थित सभी साहित्कारों का आभार व्यक्त किया।

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