शिक्षा बाज़ार बनी और विद्यार्थी उपभोक्ता : कोचिंग संस्कृति
क्या भारत के विश्वविद्यालयों के बाद कोचिंग संस्थान नई वैचारिक रणभूमि बन रहे हैं? यह लेख शिक्षा व्यवस्था, कोचिंग उद्योग, युवा मानस, वैचारिक प्रभाव और निजीकरण के बढ़ते प्रभाव का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करता है।
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