ढाई आखर प्रेम का : लोकमंगल के महाकवि कबीर
संत कबीर की लोकभाषा, निर्गुण भक्ति, सामाजिक चेतना, जाति-विरोध, पाखंड-भंजन, लोकमंगल और कालजयी दोहों का विस्तृत एवं विश्लेषणात्मक अध्ययन।
Read Moreसंत कबीर की लोकभाषा, निर्गुण भक्ति, सामाजिक चेतना, जाति-विरोध, पाखंड-भंजन, लोकमंगल और कालजयी दोहों का विस्तृत एवं विश्लेषणात्मक अध्ययन।
Read Moreसरगुजा का रामगढ़ प्रागैतिहासिक मानव बसाहट, प्राचीन नाट्यशाला, कालिदास की मेघदूत परंपरा, मौर्यकालीन अभिलेख और रामायण संस्कृति का अद्वितीय संगम है। धरोहर संरक्षण, शोध और पर्यटन विकास के माध्यम से इसे यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने की संभावनाओं पर विशेष आलेख।
Read Moreविश्व प्रकृति संरक्षण दिवस के अवसर पर भारत की जैव विविधता, पर्यावरणीय चुनौतियों, वन संरक्षण आंदोलनों, जल संकट, प्रदूषण और सतत विकास की आवश्यकता पर आधारित एक विस्तृत विश्लेषणात्मक आलेख।
Read Moreछत्रपति शिवाजी महाराज के हिंदवी स्वराज्य की कृषि नीति, भूमि मापन, कर व्यवस्था, किसानों को ब्याजमुक्त ऋण, अन्न भंडारण और बाजार प्रबंधन पर आधारित ऐतिहासिक विश्लेषण, जो आज की कृषि व्यवस्था के लिए भी प्रेरणादायी है।
Read Moreबंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के जन्म दिवस पर विशेष आलेख। जानिए कैसे वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं बल्कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरक शक्ति बना। राष्ट्रीय चेतना, स्वदेशी आंदोलन और राष्ट्रवाद के सांस्कृतिक आधार को समझने का प्रयास।
Read Moreआज सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि यदि पासपोर्ट नहीं, तो फिर क्या? इस प्रश्न का उत्तर जितनी शीघ्रता से सरकार देगी, उतनी ही शीघ्रता से भ्रम समाप्त होगा और नागरिकों का विश्वास भी मजबूत होगा। लोकतंत्र में नागरिक से प्रमाण मांगना अनुचित नहीं है, लेकिन उससे पहले यह बताना अनिवार्य है कि वह प्रमाण आखिर है क्या?
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