प्रेम, विश्वास और बढ़ती क्रूरता का दौर में बदलते रिश्तों के बीच खड़ा एक बेचैन समाज
क्या हम ऐसे दौर में प्रवेश कर चुके हैं जहाँ रिश्तों की असहमति का समाधान संवाद नहीं, बल्कि अपराध बनता जा रहा है? राजा रघुवंशी और केतन अग्रवाल हत्याकांड के बहाने रिश्तों, नैतिक मूल्यों, पारिवारिक संवाद, मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक संवेदनशीलता पर गंभीर चिंतन।
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