जब बाबा ने मेरे कान उमेंठे
सन् 1968 में जांजगीर में आयोजित उस ऐतिहासिक काव्य गोष्ठी का संस्मरण, जब यायावर कवि बाबा नागार्जुन ने अपने सहज स्वभाव, स्पष्टवादिता और कालजयी कविताओं से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया था।
Read Moreसन् 1968 में जांजगीर में आयोजित उस ऐतिहासिक काव्य गोष्ठी का संस्मरण, जब यायावर कवि बाबा नागार्जुन ने अपने सहज स्वभाव, स्पष्टवादिता और कालजयी कविताओं से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया था।
Read Moreछत्तीसगढ़ की साहित्यिक यात्रा में अनेक रचनाकारों ने हिंदी और छत्तीसगढ़ी साहित्य को नई पहचान दी है। यह आलेख राज्य के साहित्यिक विकास, सृजनशीलता और सांस्कृतिक चेतना का समग्र चित्र प्रस्तुत करता है।
Read Moreरामगढ़ पर्वत सरगुजा जिले के तहसील और विकासखंड मुख्यालय उदयपुर के बहुत नज़दीक है। पुस्तक में दी गई जानकारी के अनुसार समुद्र तल से इस पर्वत की ऊँचाई 3206 फीट और स्थानीय धरातल से 1300 फीट है। उदयपुर के कुछ पहले जजगा नामक गाँव से यह पहाड़ किसी बैठे हुए हाथी की तरह दिखाई देता है।
Read Moreदुर्ग जिले के लिमतरा गाँव की रामलीला मंडली आज भी जीवित परंपरा का प्रतीक है। यहाँ चार पीढ़ियों के कलाकारों ने भगवान श्रीराम की भूमिका निभाई और सांस्कृतिक धरोहर को आगे बढ़ाया।
Read Moreनदियाँ केवल जल का स्रोत नहीं, बल्कि मानव सभ्यता, संस्कृति और जीवन की आधारशिला हैं। इनके संरक्षण से ही पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित है। नदी पर उल्लेखनीय काव्य।
Read Moreरायपुर में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत और राजमाता फुलवा देवी की उपस्थिति में साहित्यकार डॉ. परदेशीराम वर्मा की आत्मकथा ‘सुरंग के उस पार’ का विमोचन हुआ। कार्यक्रम में साहित्य, समाज और राजनीति जगत की अनेक हस्तियां शामिल हुईं।
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