साहित्य

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प्रणम्य लेखनी के अक्षर पुरुष : साँवरमल सांगानेरिया का लोकार्पण

वाराणसी के डॉ राजेन्द्र प्रसाद पाण्डेय स्मृति समारोह के प्रथम सत्र में डॉ शुभदा पांडेय द्वारा लिखित पुस्तक प्रणम्य लेखनी के अक्षर पुरुष : साँवरमल सांगानेरिया का लोकार्पण साहित्य अकादमी के अध्यक्ष डॉ के. श्रीनिवासराव, विख्यात कहानीकार गोविंद मिश्र, प्रोफेसर चितरंजन मिश्र, डॉ जितेंद्र नाथ मिश्र, प्रोफेसर रामसुधार सिंह, डॉ दयानिधि , डा.आर्यमा सान्याल, के करकमलों से संपन्न हुआ।

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कालीदास के मेघदूत में वर्णित रामगिरि से अलकापुरी तक का काव्यमय यात्रा वृत्तांत

कालीदास का मेघदूत न केवल एक प्रेम काव्य है, बल्कि यह प्राचीन भारत के भूगोल, संस्कृति, और प्राकृतिक सौंदर्य का एक जीवंत दस्तावेज भी है। रामगढ़ से अलकापुरी तक की यह काल्पनिक यात्रा हमें भारत की विविधता और समृद्ध विरासत से परिचित कराती है।

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किसने कहा था? मनकही

किसी भी परिवार, समाज और राष्ट्र का कल्याण कर्मण्य मनुष्यों के द्वारा ही हो सकता है। इनके कार्य ही आने वाली पीढ़ियों के लिए आदर्श बन कर्मवीर बनने का आदर्श स्थापित करते हैं। अतः प्रत्येक इंसान को कर्मशील रहना चाहिए। महाभारत में श्री कृष्ण ने कहा है ‘कर्मण्येवाधिकारस्ते।’

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तलाश ढाई आखर की : सामाजिक सरोकार की कहानियां

बसंती पवार जी एक सजग और संवेदनशील लेखिका हैं, जो जीवन को शब्दों के वातायन से तलाशती हैं, उन्हीं में कुछ खोजे हुए प्रसंगों पर आधारित ये कहानियां आपसे संवाद करने को उत्सुक हैं।अपनी सरल भाषा शैली में मन की गुत्थियों को सुलझाने की प्रक्रिया हैं ये कहानियां।

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प्रतिभा का विज्ञापन लघुकथा

उसी में सब्जी वाले की लड़की, कुली का बेटा, कुल्फी वाले की भतीजी, चूड़ी वाले की बेटी, बर्तन मांजने वाली का बेटा ये सारे विशेषण उन प्रतिभाओं के साथ लगा कर पेश किए जाते हैं।

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