साहित्य

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हो सके तो…इतना ज़रूर करना

मानवता, शांति और युद्ध विरोध की भावना को व्यक्त करती स्वराज्य करुण की संवेदनशील कविता, जो परमाणु हथियारों और विनाशकारी युद्धों से मुक्त विश्व की कल्पना करती है।

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वरिष्ठ छत्तीसगढ़ी साहित्यकार और पत्रकार सुशील भोले पंचतत्व में विलीन, साहित्य जगत शोकाकुल

छत्तीसगढ़ी भाषा के वरिष्ठ साहित्यकार और पत्रकार सुशील भोले का 26 फरवरी को रायपुर में निधन हो गया। 27 फरवरी को मारवाड़ी श्मशान घाट में अंतिम संस्कार हुआ। साहित्य और पत्रकारिता जगत ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि।

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बुंदेलखंड की मिट्टी से उठी एक अमर साहित्यिक ज्योति डॉक्टर वृंदावनलाल वर्मा

डॉक्टर वृंदावनलाल वर्मा को आज जब हम उन्हें याद करते हैं तो यह अनुभव होता है कि वे कहीं गए नहीं हैं। वे अपने उपन्यासों के पन्नों में, बुंदेलखंड की धूल में और हर उस हृदय में जीवित हैं जो अपने अतीत पर गर्व करता है और भविष्य के लिए आशा रखता है। उनकी कलम की स्याही सूखी नहीं है, वह आज भी हमारी चेतना में बह रही है। 

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सिद्धांतनिष्ठ पत्रकारिता का स्वर्णिम अध्याय गुरुदेव काश्यप चौबे

गुरुदेव काश्यप चौबे के जीवन, पत्रकारिता और साहित्यिक योगदान पर विस्तृत आलेख। सिद्धांतनिष्ठ संपादक के रूप में उनका संघर्ष, व्यक्तित्व और विरासत।

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आखिरी सांस तक दौड़नेवाली आजाद कलम : राजेश शर्मा

विगत बीस वर्षों से निष्पक्ष और निर्भीक ख़बर परोसने वाली एक आज़ाद कलम सहसा हमेशा के लिए चुप हो गई। फेसबुक पर महासमुंद के युवा विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा की पोस्ट ने चौंका दिया। एकाएक विश्वास नहीं हुआ, क्योंकि वह कलम बार-बार मौत से आँख-मिचौली खेलते हुए उसे मात देती रही थी। हर बार मौत पराजित हुई थी।

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futuredपुस्तक समीक्षा

द्वेष-धर्म के विरुद्ध प्रेम-धर्म का कालजयी घोष हिन्द स्वराज : पुस्तक चर्चा

महात्मा गांधी की 117 वर्ष पुरानी पुस्तक ‘हिन्द स्वराज’ आज भी प्रेम, अहिंसा और आत्मबल का संदेश देती है। गणतंत्र-पूर्व भारत की वैचारिक यात्रा, ब्रिटिश शासन की आलोचना और समाज के लिए गांधी के दूरदर्शी विचारों को समझने हेतु यह लेख ‘हिन्द स्वराज’ तथा उसके पहले छत्तीसगढ़ी अनुवाद की ऐतिहासिक और वैचारिक महत्ता को रेखांकित करता है।

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