नववर्ष 2026 और छत्तीसगढ़ की तीन विलक्षण विभूतियाँ
नववर्ष 2026 के पहले दिन साहित्यकार नारायण लाल परमार, संत कवि पवन दीवान और वरिष्ठ पत्रकार चन्दूलाल चन्द्राकर की जीवन-यात्रा को स्मरण करता विशेष आलेख।
Read Moreनववर्ष 2026 के पहले दिन साहित्यकार नारायण लाल परमार, संत कवि पवन दीवान और वरिष्ठ पत्रकार चन्दूलाल चन्द्राकर की जीवन-यात्रा को स्मरण करता विशेष आलेख।
Read Moreमहाकवि सुभ्रमण्या भारती: तमिल साहित्य के नवजागरणकर्ता, स्वतंत्रता सेनानी और स्त्री सशक्तिकरण के प्रणेता। उनकी राष्ट्रभक्ति कविताएँ आज भी प्रेरणा स्रोत हैं।
Read Moreछत्तीसगढ़ में पत्रकारिता का इतिहास 125 वर्षों से अधिक पुराना है, जिसकी नींव वर्ष 1900 में पंडित माधवराव सप्रे द्वारा पेंड्रा से प्रकाशित ‘छत्तीसगढ़ मित्र’ ने रखी। यह वही बीज था, जो आज एक विशाल पत्रकारिता-वृक्ष के रूप में विकसित हो चुका है।
Read Moreश्रीकृष्ण का वचन “मासानां मार्गशीर्षोऽहम्” केवल धार्मिक कथन नहीं, बल्कि एक पर्यावरणीय दर्शन है। जब हम इस भाव को जीवन में अपनाते हैं, तब हमारे भीतर करुणा, संतुलन और कृतज्ञता स्वतः जागृत होती है।
Read Moreसन् 1968 में जांजगीर में आयोजित उस ऐतिहासिक काव्य गोष्ठी का संस्मरण, जब यायावर कवि बाबा नागार्जुन ने अपने सहज स्वभाव, स्पष्टवादिता और कालजयी कविताओं से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया था।
Read Moreछत्तीसगढ़ की साहित्यिक यात्रा में अनेक रचनाकारों ने हिंदी और छत्तीसगढ़ी साहित्य को नई पहचान दी है। यह आलेख राज्य के साहित्यिक विकास, सृजनशीलता और सांस्कृतिक चेतना का समग्र चित्र प्रस्तुत करता है।
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