साहित्य

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साहित्य-सृजन से भी साकार हुआ सबका सपना : छत्तीसगढ़ राज्य रजत जयंती 2025 पर विशेष 

छत्तीसगढ़ की साहित्यिक यात्रा में अनेक रचनाकारों ने हिंदी और छत्तीसगढ़ी साहित्य को नई पहचान दी है। यह आलेख राज्य के साहित्यिक विकास, सृजनशीलता और सांस्कृतिक चेतना का समग्र चित्र प्रस्तुत करता है।

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futuredपुस्तक समीक्षा

ऐतिहासिक पर्वत पर एक गहन अध्ययन : पुस्तक चर्चा

रामगढ़ पर्वत सरगुजा जिले के तहसील और विकासखंड मुख्यालय उदयपुर के बहुत नज़दीक है। पुस्तक में दी गई जानकारी के अनुसार समुद्र तल से इस पर्वत की ऊँचाई 3206 फीट और स्थानीय धरातल से 1300 फीट है। उदयपुर के कुछ पहले जजगा नामक गाँव से यह पहाड़ किसी बैठे हुए हाथी की तरह दिखाई देता है।

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लिमतरा: जहाँ चार पीढ़ियों ने निभाई भगवान श्रीराम की भूमिका, आज भी जीवंत है रामलीला की परंपरा

दुर्ग जिले के लिमतरा गाँव की रामलीला मंडली आज भी जीवित परंपरा का प्रतीक है। यहाँ चार पीढ़ियों के कलाकारों ने भगवान श्रीराम की भूमिका निभाई और सांस्कृतिक धरोहर को आगे बढ़ाया।

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नदी के नाम पैगाम : समाज की सोई चेतना को झकझोरती कविताएँ

नदियाँ केवल जल का स्रोत नहीं, बल्कि मानव सभ्यता, संस्कृति और जीवन की आधारशिला हैं। इनके संरक्षण से ही पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित है। नदी पर उल्लेखनीय काव्य।

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सुरंग के उस पार’ : डॉ. परदेशीराम वर्मा की आत्मकथा का विमोचन

रायपुर में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत और राजमाता फुलवा देवी की उपस्थिति में साहित्यकार डॉ. परदेशीराम वर्मा की आत्मकथा ‘सुरंग के उस पार’ का विमोचन हुआ। कार्यक्रम में साहित्य, समाज और राजनीति जगत की अनेक हस्तियां शामिल हुईं।

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क्या आप डाँ. बलदेव को जानते हैं?

रायगढ़ कथक घराने की परिभाषा और पहचान डॉ. बलदेव के शोध व लेखन से संभव हुई। उनके लेख सांस्कृतिक इतिहास का प्रामाणिक स्रोत माने जाते हैं।

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