साहित्य

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छत्तीसगढ़ में पले बढ़े छत्तीस भाषाओं के महारथी

छत्तीसगढ़ की माटी में, रायपुर की धरती पर पले-बढ़े हरिनाथ डे भी दुनिया की उन्हीं भूली-बिसरी विलक्षण प्रतिभाओं में से थे। उनकी जीवन यात्रा सिर्फ 34 साल की रही, लेकिन जुनून की हद तक भाषाएँ सीखने की दीवानगी ने उन्हें विश्व के महानतम भाषाविदों की प्रथम पंक्ति में प्रतिष्ठित कर दिया। उन्होंने छत्तीस भाषाओं का ज्ञान अर्जित किया।

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छत्तीसगढ़ के लोक साहित्य को समेटने वाले पंडित अमृतलाल दुबे

मध्य प्रदेश आदिम जाति कल्याण विभाग में क्षेत्र संयोजक के पद पर नियुक्त होकर कार्य आरंभ करने वाले दुबे जी जंगलों और पहाड़ों की तराई में रहने वाले आदिम जातियों के वाचिक लोक साहित्य को केवल पढ़ा ही नहीं बल्कि उसका दुर्लभ संग्रह भी किया

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आशीष ठाकुर की कृति द मोर्सल्स ऑफ लव का लोकार्पण

उनकी बहुप्रतीक्षित किताब, द मोर्सल्स ऑफ लव- प्रेम के सभी रूपों – भावुकता, आदर्शवादिता और निस्वार्थता – की हार्दिक खोज है। भावपूर्ण छंदों और गीतात्मक रचनाओं के माध्यम से, ठाकुर भावनाओं की एक ऐसी ताने-बाने को बुनते हैं जो पाठकों के अंतःकरण में प्रतिध्वनित होती है, उन्हें अपने अनुभवों और रिश्तों पर विचार करने के लिए आमंत्रित करती है।

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प्रणम्य लेखनी के अक्षर पुरुष : साँवरमल सांगानेरिया का लोकार्पण

वाराणसी के डॉ राजेन्द्र प्रसाद पाण्डेय स्मृति समारोह के प्रथम सत्र में डॉ शुभदा पांडेय द्वारा लिखित पुस्तक प्रणम्य लेखनी के अक्षर पुरुष : साँवरमल सांगानेरिया का लोकार्पण साहित्य अकादमी के अध्यक्ष डॉ के. श्रीनिवासराव, विख्यात कहानीकार गोविंद मिश्र, प्रोफेसर चितरंजन मिश्र, डॉ जितेंद्र नाथ मिश्र, प्रोफेसर रामसुधार सिंह, डॉ दयानिधि , डा.आर्यमा सान्याल, के करकमलों से संपन्न हुआ।

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कालीदास के मेघदूत में वर्णित रामगिरि से अलकापुरी तक का काव्यमय यात्रा वृत्तांत

कालीदास का मेघदूत न केवल एक प्रेम काव्य है, बल्कि यह प्राचीन भारत के भूगोल, संस्कृति, और प्राकृतिक सौंदर्य का एक जीवंत दस्तावेज भी है। रामगढ़ से अलकापुरी तक की यह काल्पनिक यात्रा हमें भारत की विविधता और समृद्ध विरासत से परिचित कराती है।

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