बुंदेलखंड की मिट्टी से उठी एक अमर साहित्यिक ज्योति डॉक्टर वृंदावनलाल वर्मा
डॉक्टर वृंदावनलाल वर्मा को आज जब हम उन्हें याद करते हैं तो यह अनुभव होता है कि वे कहीं गए नहीं हैं। वे अपने उपन्यासों के पन्नों में, बुंदेलखंड की धूल में और हर उस हृदय में जीवित हैं जो अपने अतीत पर गर्व करता है और भविष्य के लिए आशा रखता है। उनकी कलम की स्याही सूखी नहीं है, वह आज भी हमारी चेतना में बह रही है।
Read More