संत कवि पवन दीवान ने क्यों लिया था खुले बदन संन्यासी रहने का संकल्प? पुण्यतिथि विशेष
छत्तीसगढ़ के संत कवि पवन दीवान की दसवीं पुण्यतिथि पर उनके संन्यासी जीवन, सामाजिक संवेदनाओं, राज्य निर्माण आंदोलन और जनकवि रूप की प्रेरक यात्रा का स्मरण।
Read Moreछत्तीसगढ़ के संत कवि पवन दीवान की दसवीं पुण्यतिथि पर उनके संन्यासी जीवन, सामाजिक संवेदनाओं, राज्य निर्माण आंदोलन और जनकवि रूप की प्रेरक यात्रा का स्मरण।
Read Moreमानवता, शांति और युद्ध विरोध की भावना को व्यक्त करती स्वराज्य करुण की संवेदनशील कविता, जो परमाणु हथियारों और विनाशकारी युद्धों से मुक्त विश्व की कल्पना करती है।
Read Moreछत्तीसगढ़ी भाषा के वरिष्ठ साहित्यकार और पत्रकार सुशील भोले का 26 फरवरी को रायपुर में निधन हो गया। 27 फरवरी को मारवाड़ी श्मशान घाट में अंतिम संस्कार हुआ। साहित्य और पत्रकारिता जगत ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि।
Read Moreडॉक्टर वृंदावनलाल वर्मा को आज जब हम उन्हें याद करते हैं तो यह अनुभव होता है कि वे कहीं गए नहीं हैं। वे अपने उपन्यासों के पन्नों में, बुंदेलखंड की धूल में और हर उस हृदय में जीवित हैं जो अपने अतीत पर गर्व करता है और भविष्य के लिए आशा रखता है। उनकी कलम की स्याही सूखी नहीं है, वह आज भी हमारी चेतना में बह रही है।
Read Moreगुरुदेव काश्यप चौबे के जीवन, पत्रकारिता और साहित्यिक योगदान पर विस्तृत आलेख। सिद्धांतनिष्ठ संपादक के रूप में उनका संघर्ष, व्यक्तित्व और विरासत।
Read Moreविगत बीस वर्षों से निष्पक्ष और निर्भीक ख़बर परोसने वाली एक आज़ाद कलम सहसा हमेशा के लिए चुप हो गई। फेसबुक पर महासमुंद के युवा विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा की पोस्ट ने चौंका दिया। एकाएक विश्वास नहीं हुआ, क्योंकि वह कलम बार-बार मौत से आँख-मिचौली खेलते हुए उसे मात देती रही थी। हर बार मौत पराजित हुई थी।
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