मैं नीर भरी दुख की बदली
महादेवी वर्मा की अमर कविता ‘मैं नीर भरी दुख की बदली’ करुणा, विरह, आध्यात्मिक चेतना और मानवीय संवेदना का अद्वितीय स्वर है। जानिए इस काव्य रचना के दार्शनिक, साहित्यिक और भावनात्मक पक्षों का विस्तृत विश्लेषण।
Read Moreमहादेवी वर्मा की अमर कविता ‘मैं नीर भरी दुख की बदली’ करुणा, विरह, आध्यात्मिक चेतना और मानवीय संवेदना का अद्वितीय स्वर है। जानिए इस काव्य रचना के दार्शनिक, साहित्यिक और भावनात्मक पक्षों का विस्तृत विश्लेषण।
Read Moreवरिष्ठ पत्रकार आशीष सिंह की पुस्तक ‘रायपुर’ राजधानी रायपुर के हजार वर्षों के इतिहास, स्वतंत्रता आंदोलन, सांस्कृतिक विरासत और बदलते शहरी स्वरूप का रोचक दस्तावेज प्रस्तुत करती है।
Read Moreबिलासपुर में 17 मई 2026 को डॉ. पालेश्वर प्रसाद शर्मा की स्मृति में भव्य साहित्यिक आयोजन होगा। कार्यक्रम में पुस्तकों का लोकार्पण, साहित्यिक विमर्श और विभिन्न सम्मान प्रदान किए जाएंगे।
Read More‘तत्वमसि’ उपन्यास के माध्यम से श्रीधर पराड़कर ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और प्रचारक जीवन के त्याग, अनुशासन, राष्ट्रसेवा एवं भारतीय दर्शन को सरल और रोचक शैली में प्रस्तुत किया है।
Read Moreछत्तीसगढ़ी के प्रथम उपन्यास ‘हीरू के कहिनी’ के शताब्दी वर्ष पर आधारित यह लेख इसके इतिहास, कथानक और साहित्यिक महत्व को विस्तार से प्रस्तुत करता है।
Read Moreजी. आर. राना के काव्य-संग्रह ‘सूरज कहाँ छिपा है’ पर आधारित यह विस्तृत आलेख प्रकृति, समाज, गाँव-शहर और मानवीय संवेदनाओं की गहन व्याख्या प्रस्तुत करता है।
Read More