Author: News Editor

futuredसम्पादकीय

मांगलिक अवसरों पर गृह अलंकरण की प्राचीन परम्परा

रंगोली दीपावली की साज सज्जा का प्रमुख आकर्षण होता है, वैसे द्वार सज्जा के लिए पत्र पुष्पों का भी प्रयोग करने प्राचीन परम्परा रही है। जिसका प्रयोग हम आज भी आम की तोरण/बंदनवार रुप में परम्परा से करते आ रहे हैं।

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futuredताजा खबरें

पीएम मोदी ने ₹12,850 करोड़ की स्वास्थ्य परियोजनाओं का शुभारंभ, आयुष्मान भारत योजना का वृद्धों के लिए विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार, 29 अक्टूबर 2024 को ₹12,850 करोड़ की विकास परियोजनाओं का शुभारंभ किया और 70 वर्ष से ऊपर के सभी वरिष्ठ नागरिकों के लिए आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना का विस्तार किया।

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futuredछत्तीसगढ

युवाओं के लिए संवैधानिक साक्षरता पर रोविंग सेमिनार

रोविंग सेमिनार पहल, आकर्षक और इंटरैक्टिव सत्रों के माध्यम से, भारतीय संविधान के मूल्यों के प्रति आदरांजलि के रूप में छत्तीसगढ़ के कई स्कूलों में भी आयोजित की जाएगी।

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futuredसमाज

एक और उलगुलान-डी-लिस्टिंग के सूत्रधार जनजातीय उद्धारक बाबा कार्तिक उरांव

ऐसे में यह प्रश्न उठता है कि वह जनजातीय कहां रह जाता है? वह तो ईसाई बन जाता है। फिर ऐसे व्यक्ति को आरक्षण इत्यादि का लाभ क्यों मिले? यही यक्ष प्रश्न आज भी खड़ा हुआ है।

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futuredधर्म-अध्यात्म

भगवान धन्वंतरि के प्राकट्य एवं स्वास्थ्य और समृद्धि का पर्व धनतेरस

भगवान धन्वंतरि को हिंदू धर्म और भारतीय चिकित्सा विज्ञान (आयुर्वेद) में एक महान चिकित्सक और देवताओं के वैद्य के रूप में मान्यता प्राप्त है। उन्हें स्वास्थ्य, औषधि और चिकित्सा विज्ञान के देवता के रूप में भी पूजा जाता है। धन्वंतरि की उपासना विशेष रूप से आयुर्वेद और चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोगों द्वारा की जाती है।

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futuredधर्म-अध्यात्म

दूसरों को दोष मत दो : स्वामी विवेकानन्द

‘एक मंदिर के सामने एक सन्यासी रहता था और उसी के पास वाले घर में एक वेश्या भी रहती थी । सन्यासी रोजाना उस वेश्या पर चिल्लाता, उसकी निन्दा करता। उधर वेश्या अपने दुष्कर्म का पश्चाताप करते हुए सदैव ईश्वर की प्रार्थना में लीन रहती।

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