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प्रकृति का अनुपम उपहार छत्तीसगढ़ : संदर्भ यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल

मयंक दुबे

छत्तीसगढ़, भारत के हृदय में बसा एक सम्पन्न राज्य है, जो सांस्कृतिक विरासत और मनोरम प्राकृतिक परिदृश्यों के एक समृद्ध ताने-बाने को समेटे हुए है। वर्तमान में यह राज्य प्रतिष्ठित यूनेस्को विश्व धरोहर सूची से खुद को अनुपस्थित पाता है। जहाँ सम्पूर्ण भारत इन सांस्कृतिक और प्राकृतिक खजानों की विविधता से भरा हुआ है, वहीं छत्तीसगढ़ राज्य के लिए अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त करने की क्षमता वाले स्थल की पहचान करने और उसे विकसित करने का एक अनूठा अवसर प्रस्तुत करता है। यूनेस्को मान्यता या पदनाम प्राप्त करना न केवल चुने गए स्थल के लिए बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए बहुत लाभप्रद सकता है। यह लेख छत्तीसगढ़ में यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त स्थल होने के संभावित लाभों का पता लगाने और भविष्य में विकास की संभावनाओं पर विचार करने के उद्देश्य से प्रस्तुत किया जा रहा है।

संभावित उम्मीदवार/स्थल की पहचान करना:

यूनेस्को मान्यता प्राप्ति के लिए संभावित उम्मीदवार की पहचान करने के लिए सावधानीपूर्वक विचार करने की आवश्यकता है। छत्तीसगढ़ राज्य एक समृद्ध सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत का खजाना संजोये हुए है, जो इसे यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल मान्यता के लिए एक मजबूत दावेदार बनाता है। हालांकि, असाधारण सांस्कृतिक या प्राकृतिक महत्व वाले स्थल का चयन करना बहुत ही महत्वपूर्ण व जटिल है।

यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल ऐसे खास स्थानों (जैसे वन क्षेत्र, पर्वत, झील, मरुस्थल, स्मारक, भवन, या शहर इत्यादि) को कहा जाता है, जो विश्व धरोहर स्थल समिति द्वारा चयनित होते हैं; और यही समिति इन स्थलों की देखरेख यूनेस्को के तत्वाधान में करती है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विश्व के ऐसे स्थलों को चयनित एवं संरक्षित करना होता है जो विश्व संस्कृति की दृष्टि से मानवता के लिए महत्वपूर्ण हैं। सबसे पहले हम यह समझ लें कि यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल तीन मौजूदा श्रेणियों में आते हैं:

A. सांस्कृतिक: स्मारक, पुरातात्विक स्थल, ऐतिहासिक बस्तियाँ (रिहायश) और सांस्कृतिक परिदृश्य।

B. प्राकृतिक: असाधारण जैव विविधता के परिदृश्य, भूवैज्ञानिक संरचनाएँ और आवास।

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C. मिश्रित: महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और प्राकृतिक मूल्य वाले स्थल।

छत्तीसगढ़ की खूबियों पर विचार करते हुए हम पाते हैं कि छत्तीसगढ़ राज्य में हमारे पास मौजूद हैं:

1. सांस्कृतिक: आदिवासी (स्थानीय) विरासत, प्राचीन मंदिर, मध्ययुगीन किले, सिरपुर (जिसे पहले श्रीपुर के नाम से जाना जाता था) जैसे ऐतिहासिक स्थल – प्राचीन शहर में बौद्ध मठ, मंदिर और गुप्त साम्राज्य के अवशेष हैं। यहाँ उल्लेख करना चाहूंगा कि सिरपुर को विश्व विरासत स्थल के रूप में पहचान दिलाने और विकसित करने के प्रयास कई दशकों से चल रहे हैं।

2. प्राकृतिक: हरे-भरे जंगल, झरने (जैसे, चित्रकोट जलप्रपात), गुफाएँ (जैसे, कुटुमसर गुफाएँ), समृद्ध वन्यजीव अभयारण्य (जैसे, बस्तर की पहाड़ियाँ और कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान: यह क्षेत्र प्राकृतिक सुंदरता और आदिवासी संस्कृति का एक अनूठा मिश्रण प्रस्तुत करता है। पार्क की जैव विविधता और स्वदेशी समुदाय बहुत मूल्यवान हैं)।

भविष्य के विकास के लिए रणनीतियाँ:

यूनेस्को मान्यता की राह में एक जटिल नामांकन प्रक्रिया शामिल है, जिसमें विस्तृत दस्तावेज़ीकरण, शोध और बहाली के प्रयास महत्वपूर्ण कदम जैसे बिंदु प्रमुख हैं। इस प्रयास से न केवल नामांकन को मजबूती मिलेगी, बल्कि छत्तीसगढ़ की विरासत की गहरी समझ और सराहना भी होगी। छत्तीसगढ़ महत्वपूर्ण विकास को बढ़ावा देने के लिए इस प्रक्रिया का लाभ उठा सकता है।

यहाँ कुछ प्रमुख बिंदु बताये गए हैं:

1. अनुसंधान और व्यापक दस्तावेज़ीकरण: साइट (स्थल) के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक या प्राकृतिक महत्व को स्थापित करने के लिए व्यापक शोध। शोध और सर्वेक्षणों के माध्यम से स्थल की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, वास्तुशिल्प महत्व या पारिस्थितिक मूल्य का सावधानीपूर्वक दस्तावेज़ीकरण नामांकन प्रक्रिया के लिए एक मजबूत आधार तैयार करता है।

2. सामुदायिक जुड़ाव: पूरी प्रक्रिया में स्थानीय समुदायों को शामिल करने से स्वामित्व की भावना को बढ़ावा मिलता है और यह सुनिश्चित होता है कि उनके सांस्कृतिक अधिकारों और परंपराओं का सम्मान किया जाए, साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि उनकी चिंताओं का समाधान किया जाए और लाभ साझा किए जाएं।

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3. भागीदारी और सहयोग: राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विरासत संगठनों के साथ सहयोग करने से नामांकन प्रक्रिया और उसके बाद के प्रबंधन के दौरान विशेषज्ञता और संसाधनों तक पहुँच मिलती है।

4. बुनियादी ढाँचा और प्रबंधन योजना: सतत/टिकाऊ बुनियादी ढाँचा, आगंतुक प्रबंधन योजनाएँ और शैक्षिक सुविधाएँ विकसित करना आगंतुक अनुभव को बढ़ाता है और स्थल की दीर्घकालिक भलाई सुनिश्चित करता है। संरक्षण, रखरखाव और आगंतुक प्रबंधन के लिए एक व्यापक योजना विकसित करने की आवश्यकता है।

5. जन जागरूकता: स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर समर्थन व सहयोग प्राप्त करने के लिए स्थल के महत्व और यूनेस्को मान्यता के लाभों के बारे में जागरूकता बढ़ाना महत्वपूर्ण है।

यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल में शामिल होना, छत्तीसगढ़ को कई मायनों में एक बहुत बड़ी मान्यता दिलाएगा, जिससे यह वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर उभर कर आएगा। यह मान्यता राज्य की अनूठी सांस्कृतिक और प्राकृतिक सुंदरता का अनुभव करने में रुचि रखने वाले अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित करेगी। पर्यटन में वृद्धि से स्थानीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण राजस्व आएगा, जिससे आतिथ्य, परिवहन और स्मारिका उद्योगों में रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल सूची में नाम जुड़ने के कुछ लाभ इस प्रकार हैं:

1. परिरक्षण एवं संरक्षण: विश्व धरोहर का दर्जा कड़े संरक्षण उपायों को आवश्यक बनाता है। यह सुनिश्चित करता है कि स्थल को समर्पित फ़ायदे मिलें, जिसमें परिरक्षण व संरक्षण के लिए खोज और विशेषज्ञता, मूल्यवान सांस्कृतिक और प्राकृतिक महत्त्व के स्थल को खराब होने से रोकना और भविष्य की पीढ़ियों के लिए इन खजानों की और अधिक सुरक्षा करना जैसे मुद्दे शामिल हैं।

2. पर्यटन और आर्थिक विकास में वृद्धि: यूनेस्को मान्यता वैश्विक सुर्ख़ियों (स्पॉटलाइट) के रूप में कार्य करता है, जो दुनिया भर से पर्यटकों को आकर्षित करता है। यह आमद होटल, रेस्तरां और परिवहन सेवाओं के लिए राजस्व उत्पन्न करके स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को बढ़ावा देती है। इसके अतिरिक्त, यह संबंधित बुनियादी ढाँचे के विकास को बढ़ावा देता है, जिससे नए रोजगार के अवसर पैदा होते हैं। स्थानीय व्यवसाय, विशेष रूप से आतिथ्य और यात्रा क्षेत्रों में, महत्वपूर्ण वृद्धि का अनुभव करते हैं।

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3. सतत और सामुदायिक विकास: यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों के लिए सतत प्रबंधन प्रथाओं पर जोर देता है। यह जिम्मेदार पर्यटन को प्रोत्साहित करता है, भविष्य की पीढ़ियों के लिए स्थल की पारिस्थितिक अखंडता और सांस्कृतिक ताने-बाने की सुरक्षा करता है। यह मान्यता स्थानीय समुदायों के बीच गर्व और स्वामित्व की भावना को बढ़ावा देती है। सतत पर्यटन प्रथाओं को विकसित किया जा सकता है, जिससे रोजगार पैदा हो सकते हैं और स्थानीय निवासियों को सशक्त बनाया जा सकता है।

4. वैश्विक मान्यता और पहचान: छत्तीसगढ़ को महत्वपूर्ण सांस्कृतिक या प्राकृतिक विरासत वाले गंतव्य के रूप में अंतर्राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त होने से यह राज्य की छवि को बढ़ाता है और सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सहयोग के द्वार खोलता है। इससे स्थानीय लोगों में गर्व की भावना पैदा होती है, तथा सांस्कृतिक पहचान की भावना मजबूत होती है।

लेख के अंत में, यही कहाँ चाहूँगा कि यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल की सूची में मान्यता, छत्तीसगढ़ के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि होगी। यह न केवल राज्य की समृद्ध विरासत को संरक्षित करेगा, बल्कि विकास और वृद्धि की अपार संभावनाओं को भी खोलेगा। राज्य में सांस्कृतिक और प्राकृतिक खजानों का खजाना है, जिसे वैश्विक मंच पर मान्यता मिलने का इंतज़ार है। सही स्थल की पहचान करके तथा एक सहयोगात्मक और सुनियोजित नामांकन प्रक्रिया अपनाकर, छत्तीसगढ़ अपने आपको सांस्कृतिक और प्राकृतिक चमत्कारों के विश्व मानचित्र पर स्थापित कर सकता है, तथा अपने छिपे हुए स्थलों को दुनिया के सामने प्रदर्शित कर सकता है, छत्तीसगढ़ आर्थिक समृद्धि से लेकर सांस्कृतिक पुनरोद्धार तक अनेक लाभ प्राप्त कर सकता है।

मयंक दुबे (@dubeymayankk)
संपर्क: 99680 41077
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