futuredखेत-खलिहान

कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित तीन दिवसीय आम महोत्सव का भव्य समापन

रायपुर, 31 मई 2026। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय आम महोत्सव का रविवार को भव्य समापन हुआ। समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि भारतीय संस्कृति में आम केवल एक फल नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और सामाजिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने गांवों में सामुदायिक सहभागिता से आम के बगीचे अर्थात “अमराई” लगाने की पुरानी परंपरा को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने कहा कि आम के फल, पत्तों और लकड़ी का धार्मिक अनुष्ठानों एवं सामाजिक रीति-रिवाजों में विशेष महत्व है। समय के साथ गांवों में अमराई लगाने की परंपरा लगभग विलुप्त होती जा रही है, जबकि यह पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक समरसता का उत्कृष्ट माध्यम रही है।

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, संचालनालय उद्यानिकी एवं प्रक्षेत्र वानिकी तथा प्रकृति की ओर सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान में 29 से 31 मई तक आयोजित इस राष्ट्रीय आम महोत्सव में देशभर के 400 से अधिक किसानों ने भाग लिया। महोत्सव में आम की लगभग 250 किस्मों के दो हजार से अधिक प्रदर्श प्रदर्शित किए गए, जिन्हें देखने हजारों लोग पहुंचे।

यह भी पढ़ें  जब एक नारी ने बदली इतिहास की दिशा : अहिल्याबाई होल्कर,

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि तीन दिनों तक चले इस आयोजन को रायपुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ के लोगों का भरपूर स्नेह मिला। आम की विविध किस्मों को देखने के लिए बड़ी संख्या में दर्शक पहुंचे। महोत्सव के दौरान आम और आम के पौधों की लगभग 20 से 25 लाख रुपये तक की बिक्री हुई, जो इस आयोजन की लोकप्रियता और सफलता को दर्शाती है। उन्होंने आयोजन की सफलता के लिए विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल, वैज्ञानिकों, अधिकारियों, आयोजन समिति तथा सहभागी किसानों को बधाई दी।

समारोह की अध्यक्षता करते हुए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने बताया कि यह लगातार तीसरा वर्ष है जब विश्वविद्यालय द्वारा राष्ट्रीय आम महोत्सव का आयोजन किया गया है। प्रत्येक वर्ष आम नागरिकों की बढ़ती भागीदारी इस आयोजन की लोकप्रियता को प्रमाणित करती है। उन्होंने कहा कि आगामी वर्ष इसे और अधिक भव्य एवं विस्तृत स्वरूप में आयोजित किया जाएगा।

यह भी पढ़ें  जब कोलकाता से उगा हिन्दी पत्रकारिता का सूरज

डॉ. चंदेल ने बताया कि छत्तीसगढ़ की जलवायु आम उत्पादन के लिए अत्यंत अनुकूल है। राज्य में लगभग एक लाख हेक्टेयर क्षेत्र में आम की खेती की जा रही है। महोत्सव के दौरान आम की विभिन्न किस्मों और आम आधारित व्यंजनों पर केंद्रित प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

समापन समारोह में आम की व्यावसायिक, संकर, विशिष्ट और विदेशी किस्मों की प्रदर्शनी में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को प्रथम, द्वितीय, तृतीय तथा सांत्वना पुरस्कार प्रदान किए गए। आम से बने व्यंजनों की प्रतियोगिता तथा पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाली संस्थाओं को भी सम्मानित किया गया।

महोत्सव में दशहरी, लंगड़ा, चौसा, केसर, अलफांसो, तोतापुरी, नीलम, फजली जैसी लोकप्रिय व्यावसायिक किस्मों के साथ-साथ मल्लिका, आम्रपाली, सिंधु और रत्ना जैसी संकर किस्में भी आकर्षण का केंद्र रहीं। वहीं हाथीझुल, नूरजहां और गुलाब खास जैसी विशिष्ट किस्मों तथा जापान की प्रसिद्ध मियाजाकी सहित विदेशी किस्मों ने भी दर्शकों का ध्यान खींचा।

यह भी पढ़ें  संघ का किसी से कोई द्वेष नहीं, सबके साथ संवाद की भावना – सुनील आंबेकर जी

आम महोत्सव में मैंगो क्विज, फैंसी ड्रेस, आम सजावट, बोनसाई, आम आधारित मॉडल निर्माण तथा आम से निर्मित उत्पादों की प्रतियोगिताएं भी आयोजित की गईं। आम पना, आमरस, अचार, चटनी, जैम, पापड़ और अन्य उत्पादों की प्रदर्शनी एवं प्रतियोगिता ने लोगों को खूब आकर्षित किया। प्रसिद्ध शेफ आकांक्षा रॉय ने आम से विभिन्न व्यंजन बनाने का प्रदर्शन भी किया।

महोत्सव के दौरान आयोजित तकनीकी सत्रों में कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को आधुनिक आम उत्पादन तकनीकों, प्रबंधन और सरकारी योजनाओं की जानकारी प्रदान की। साथ ही पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रकृति की ओर सोसायटी द्वारा 11 आम की गुठलियां लाने वाले लोगों को उन्नत किस्म के आम के पौधे भी वितरित किए गए।