नक्सल प्रभावित क्षेत्र में खेलों की नई पहचान, ट्राइबल गेम्स से उभरी नई उम्मीद: रक्षा खडसे
1 अप्रैल 2026: कभी नक्सलवाद के लिए चर्चित रहे बस्तर अंचल में अब खेलों के जरिए नई पहचान बन रही है। रक्षा खडसे ने ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026’ के दौरान क्षेत्र का दौरा करते हुए इस बदलाव को “नई उम्मीद की शुरुआत” बताया।
उन्होंने कहा कि जिस इलाके को कभी संघर्ष और पिछड़ेपन से जोड़ा जाता था, आज वहीं के युवा खेलों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। “यह बदलाव बताता है कि सही अवसर मिलने पर यहां के खिलाड़ी देश और दुनिया में नाम रोशन कर सकते हैं,” उन्होंने कहा।
इस राष्ट्रीय स्तर के आयोजन में देशभर से 2500 से अधिक आदिवासी खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। केंद्रीय मंत्री ने आयोजन को सफल बनाने के लिए भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) और स्थानीय प्रशासन की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह प्रतियोगिता आदिवासी युवाओं को मंच देने के साथ-साथ उनके भविष्य को नई दिशा दे रही है।
रक्षा खडसे ने भरोसा जताया कि इन खेलों में हिस्सा लेने वाले कई खिलाड़ी भविष्य में ओलंपिक, एशियाई और राष्ट्रमंडल खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। उन्होंने इस पहल का श्रेय नरेंद्र मोदी के विजन और केंद्र सरकार की नीतियों को दिया, जिनका उद्देश्य खेलों को गांव-गांव तक पहुंचाना है।
कार्यक्रम के दौरान ‘अस्मिता लीग’ की सफलता भी खास तौर पर सामने आई। इस लीग से जुड़ी बड़ी संख्या में महिला खिलाड़ियों ने ट्राइबल गेम्स में शानदार प्रदर्शन किया। हॉकी, वेटलिफ्टिंग, फुटबॉल और तैराकी जैसे खेलों में इन खिलाड़ियों ने पदक जीतकर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई।
खडसे ने बताया कि कई खेलों में 60 से 70 प्रतिशत तक प्रतिभागी ‘अस्मिता लीग’ से जुड़े रहे हैं। खासकर तैराकी में सभी स्वर्ण पदक इन्हीं खिलाड़ियों ने अपने नाम किए। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य इस लीग को गांव स्तर तक पहुंचाकर अधिक से अधिक महिलाओं को खेलों से जोड़ना है।
उन्होंने यह भी कहा कि बस्तर जैसे क्षेत्रों में खेल अब केवल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का माध्यम बन चुके हैं, जो युवाओं को नई दिशा और पहचान दे रहे हैं।

