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एशियाई खेलों की तैयारी में जुटीं तीरंदाज कोमालिका बारी, ट्राइबल गेम्स में मजबूत प्रदर्शन का भरोसा

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में तीरंदाजी स्पर्धा का प्रमुख आकर्षण बनीं झारखंड की प्रतिभाशाली तीरंदाज कोमालिका बारी एशियाई खेलों के चयन को ध्यान में रखते हुए अपनी तैयारियों को अंतिम रूप दे रही हैं। वह इस मंच पर दमदार प्रदर्शन को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नजर आ रही हैं।

कोमालिका बारी ने जूनियर स्तर पर देश को गौरवान्वित करते हुए विश्व कैडेट और विश्व जूनियर खिताब जीतकर खास पहचान बनाई थी। इस उपलब्धि के साथ वह दीपिका कुमारी के बाद ऐसा करने वाली भारत की दूसरी महिला रिकर्व तीरंदाज बनीं। हालांकि, सीनियर स्तर पर उन्हें कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है और अब वह एशियाई खेलों के लिए भारतीय टीम में जगह पक्की करने के प्रयास में जुटी हैं।

फिलहाल राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर में शामिल कोमालिका अपनी तकनीक के साथ-साथ मानसिक मजबूती पर भी खास ध्यान दे रही हैं। उनका कहना है कि बड़े टूर्नामेंट्स में दबाव को संभालना उतना ही जरूरी होता है, जितना तकनीकी कौशल।

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कोमालिका की यात्रा भी संघर्षों से भरी रही है। महज 12 साल की उम्र में उन्होंने तीरंदाजी शुरू की, जिसमें उनकी मां—जो एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं—ने अहम भूमिका निभाई। शुरुआती दिनों में संसाधनों की कमी के चलते उन्हें बांस से बने धनुष से अभ्यास करना पड़ा, लेकिन उनके हौसले ने कभी हार नहीं मानी।

बाद में उन्होंने जमशेदपुर की टाटा आर्चरी अकादमी में प्रशिक्षण लिया, जहां कोचों के मार्गदर्शन में उनके खेल को नई दिशा मिली। यहां तक पहुंचने के लिए उन्हें रोजाना लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी, जो उनके समर्पण को दर्शाता है।

कोमालिका का मानना है कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स जैसे आयोजन जनजातीय क्षेत्रों की प्रतिभाओं को सामने लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि वह चाहती हैं कि अधिक से अधिक युवा इस मंच से प्रेरित होकर खेलों को करियर के रूप में अपनाएं।

24 वर्षीय कोमालिका इस प्रतियोगिता में व्यक्तिगत, टीम और मिश्रित टीम स्पर्धाओं में हिस्सा ले रही हैं। उनका लक्ष्य सिर्फ एशियाई खेलों में जगह बनाना ही नहीं, बल्कि 2028 ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करना भी है।

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उन्होंने कहा कि खेलों में उतार-चढ़ाव स्वाभाविक हैं, लेकिन निरंतर मेहनत और दृढ़ संकल्प से हर चुनौती को पार किया जा सकता है।