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बस्तर में नक्सलवाद के खिलाफ बड़ी प्रतीकात्मक सफलता, गोगुंडा पहाड़ पर नक्सली स्मारक ध्वस्त

छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में नक्सल विरोधी अभियानों को एक अहम प्रतीकात्मक बढ़त मिली है। सुकमा जिले के गोगुंडा पहाड़ पर सुरक्षा बलों ने कार्रवाई करते हुए कुख्यात नक्सली कमांडर और सेंट्रल कमेटी सदस्य रमन्ना की स्मृति में बनाए गए विशाल स्मारक को ध्वस्त कर दिया। करीब 20 फीट ऊंचा यह स्मारक नक्सलियों के प्रभाव और वर्चस्व का प्रतीक माना जाता था।

गोगुंडा पहाड़ को लंबे समय तक नक्सलियों का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। बीते लगभग 40 वर्षों से यह इलाका सुरक्षाबलों की नियमित पहुंच से बाहर था। घने जंगलों और नक्सलियों की भारी मौजूदगी के कारण इसे अजेय क्षेत्र के रूप में देखा जाता था। हाल ही में सीआरपीएफ की 74वीं बटालियन द्वारा यहां नया सुरक्षा कैंप स्थापित किए जाने के बाद हालात में बड़ा बदलाव आया है। अब यह क्षेत्र पूरी तरह नक्सली प्रभाव से मुक्त बताया जा रहा है।

गौरतलब है कि शीर्ष नक्सली नेता रमन्ना की वर्ष 2020 में हार्ट अटैक से मौत हो गई थी। इसके बाद नक्सलियों ने गोगुंडा पहाड़ियों पर उसका स्मारक बनवाया था, जिसे वे अपनी ताकत और डर के प्रतीक के रूप में इस्तेमाल करते थे।

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इस स्मारक को हटाने के लिए सीआरपीएफ की 74वीं बटालियन और कोबरा की 201वीं बटालियन ने संयुक्त रूप से विशेष अभियान चलाया। सुरक्षाबलों ने इलाके को चारों ओर से सुरक्षित कर स्मारक को पूरी तरह जमींदोज कर दिया।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई केवल भौतिक ढांचे को गिराने तक सीमित नहीं है, बल्कि नक्सलियों की उस विचारधारा और मनोवैज्ञानिक प्रभाव को खत्म करने की दिशा में भी एक मजबूत संदेश है, जिसे वे ऐसे प्रतीकों के माध्यम से फैलाने की कोशिश करते हैं।

बस्तर के जंगलों में अब नक्सलियों का भय लगातार कमजोर पड़ रहा है। सुरक्षा बलों का कहना है कि आने वाले समय में न केवल नक्सली गतिविधियों पर लगाम लगेगी, बल्कि उनके बनाए गए सभी प्रभावशाली चिन्हों और स्मृतियों को भी क्रमशः समाप्त किया जाएगा।