स्वामी विवेकानंद

futuredहमारे नायक

स्वामी विवेकानंद का राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक चेतना: आत्मगौरव से राष्ट्रनिर्माण तक

स्वामी विवेकानंद के राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक चेतना पर केंद्रित यह आलेख बताता है कि आत्मगौरव, सेवा, वेदांत और युवाशक्ति के माध्यम से उन्होंने आधुनिक भारत की वैचारिक नींव कैसे रखी।

Read More
futuredराजनीति

महान परम्परा की मजबूत धुरी मोहन भागवत

11 सितंबर भारत के लिए ऐतिहासिक दिन है। स्वामी विवेकानंद के विश्वबंधुत्व संदेश से लेकर 9/11 हमले की स्मृति तक, यह दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत जी के जन्मदिवस से भी जुड़ा है। उनके नेतृत्व और समर्पण पर एक विशेष लेख।

Read More
futuredधर्म-अध्यात्म

शिकागो संभाषण 11 सितंबर, भारतीय संज्ञा प्रज्ञा विज्ञा का परिचय

स्वामी विवेकानंद के शिकागो भाषण और उनके विचार आज भी भारतीय संस्कृति, राष्ट्रवाद और आध्यात्मिकता के मार्गदर्शक हैं। यह आलेख बताता है कि कैसे उनके संदेश विश्व को प्रेरित करते हुए भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने का मार्ग दिखाते हैं।

Read More
futuredधर्म-अध्यात्म

स्वामी विवेकानंद का ऐतिहासिक भाषण और भारत का गौरव

11 सितंबर 1893 को शिकागो धर्म संसद में स्वामी विवेकानंद के “मेरे प्यारे भाइयो और बहनो” संबोधन ने विश्व को भारतीय दर्शन, सहिष्णुता और मानवता का संदेश दिया। यह क्षण हर भारतवासी के लिए गर्व का प्रतीक है।

Read More
futuredधर्म-अध्यात्म

रामकृष्ण मिशन: सेवा, शिक्षा और अध्यात्म का विश्वव्यापी संगम

रामकृष्ण मिशन, जिसकी स्थापना स्वामी विवेकानंद ने 1897 में की थी, एक धार्मिक, सामाजिक और गैर-राजनीतिक संगठन है जो विश्वभर में सेवा, शिक्षा और अध्यात्म के क्षेत्रों में कार्यरत है। यह मिशन मानवता की सेवा को ईश्वर-सेवा मानते हुए स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, आपदा राहत और आध्यात्मिक जागरूकता जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। मिशन का उद्देश्य “मानव में ईश्वर की सेवा” और सभी धर्मों में सामंजस्य स्थापित करना है।

Read More