सीतामढ़ी

futuredधर्म-अध्यात्म

दिव्य धरा सों उपजी सीता, मिथिलेश्वर भयो नेह अतीता

जनकसुता अवनिधिया  राम प्रिया लवमात। चरणकमल जेहि उन बसै सीता सुमिरै प्रात। भारत में जनकनंदिनी सीता का जन्मदिवस धूमधाम से

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futuredपुस्तक समीक्षासाहित्य

इतिहास के आइने में बेलसंड-सीतामढ़ी

सीतामढ़ी का महत्व रामायण की कथा के अनुसार सही ढंग से समझा जा सकता है। राजा जनक सीतामढ़ी के पुनौरा और उर्विजा कुंड क्षेत्र में अनावृष्टि को रोकने हेतु हल चलाने, कृषि कर्म का उद्घाटन करने आये थे। इसी-के दौरान सीता जी प्राप्त हुई। इसी क्षेत्र में हलेश्वर स्थान मंडल है, जहाँ कृषि कर्म के उपरान्त हल रखा गया था। सीता जी की स्मृति से ही जुड़ा एक स्थान पंथपाकड़ है, जहाँ पर विवाह उपरान्त आयोध्या जाते हुये सीता जी की डोली रखी गयी थी,

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