सामाजिक समरसता

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सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक छठ पूजा

छठ पूजा भारतीय संस्कृति का एक अनमोल रत्न है, जो सूर्य देव की उपासना के माध्यम से सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बनता है। प्रकृति पूजा, नारी सशक्तीकरण और पर्यावरण संरक्षण के आयामों से परिपूर्ण यह पर्व हमें सिखाता है कि सादगी में ही सच्ची समृद्धि छिपी है।

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स्व का बोध से पर्यावरण संरक्षण तक: भारत निर्माण की दिशा

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा प्रतिपादित पंच परिवर्तन सूत्र – स्व का बोध, कुटुंब प्रबोधन, नागरिक कर्तव्य, सामाजिक समरसता और पर्यावरण संरक्षण – समाज को सशक्त और समरस बनाने का मार्गदर्शन करते हैं।

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futuredलोक-संस्कृति

रिश्तों की दृढ़ता, सामाजिक समरसता और पर्यावरण संरक्षण का अद्भुत पर्व रक्षाबंधन

रक्षाबंधन भाई-बहन के अटूट रिश्ते, सामाजिक एकता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने वाला भारतीय पर्व है, जो प्रेम, विश्वास और जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करता है।

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सद्गुरु कबीर प्राकट्य महोत्सव: गोकुल नगर में श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक समरसता का अनुपम संगम

दुर्ग जिले के गोकुल नगर, पुलगांव में 15 जून को सद्गुरु कबीर प्राकट्य दिवस समारोह भक्ति, श्रद्धा और सामाजिक समरसता के साथ मनाया गया। संत प्रवचनों में कबीर साहेब की शिक्षाओं — जातिवाद, छुआछूत और हिंसा के विरोध — पर बल दिया गया। सैकड़ों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में आयोजन भंडारे और संत भेंट पूजा के साथ संपन्न हुआ।

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futuredसाहित्य

धर्म की दीपिका अहिल्या माई : काव्य रचना

माता अहिल्याबाई होलकर के जीवन और कार्यों पर आधारित एक भावात्मक काव्यात्मक कविता जो नारी शक्ति, धर्मपालन, सेवा और राष्ट्रनिर्माण की भावना से ओतप्रोत है ।

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futuredहमारे नायक

सांस्कृतिक पुनर्जागरण की अग्रदूत: पुण्यश्लोका अहिल्याबाई

पुण्यश्लोका देवी अहिल्याबाई ऐसी ही विलक्षण विभूति थीं, जो पूरे भारत राष्ट्र, समाज और संस्कृति के लिये समर्पित रहीं। वे एक छोटे से राज्य इंदौर की शासक थीं, पर उनके हृदय में पूरा भारत राष्ट्र समाया हुआ था।

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