संविधान सभा

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स्वाधीनता संग्राम, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और राष्ट्र निर्माण के शिल्पकार : के. एम. मुंशी

के. एम. मुंशी का जीवन स्वतंत्रता संग्राम, सांस्कृतिक चेतना, संविधान निर्माण, सोमनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार और साहित्य साधना का प्रेरक अध्याय है।

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futuredराजनीति

संविधान में समाया भारत का सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जीवन : संविधान दिवस विशेष

भारतीय संविधान के बाईस चित्र भारत की संस्कृति, इतिहास और राष्ट्र जीवन की मूल चेतना को दर्शाते हैं। जानिए इन चित्रों के गहरे संदेश और महत्व।

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भारतीय संविधान: लोकतंत्र का आधार और विशेषताएँ

26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के साथ गणतंत्र दिवस उत्सव मनाने की परंपरा भी आरंभ हुई। 26 जनवरी 1950 को पहले गणतंत्र दिवस पर भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने 21 तोपों की सलामी के साथ ध्वजारोहण किया था। ध्वजारोहण के साथ राष्ट्रगान “जन गण मन…” का गायन हुआ और डा राजेन्द्र प्रसाद जी ने राष्ट्र को संबोधित करते हुये भारत के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों एवं अन्य वीर सपूतों का स्मरण किया।

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अंग्रेजियत के विरुद्ध संघर्ष और भारतीय संस्कृति के प्रति समर्पण: माधवहरि अणे

अणे पर लोकमान्य तिलक जी का प्रभाव उनके समाचारपत्र ‘मराठा’ और ‘केसरी’  के कारण पड़ा।  वे इन पत्रों के नियमित पाठक थे। 1914 में जब तिलक जी जेल से छूटकर आये तो अणे जी उनसे मिलने वालों में शामिल थे। इसी भेंट के बाद उनके तिलक जी से संबंध बने और वे तिलक जी के निकट आ गये।

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