श्री उमेश चौरसिया

futuredधर्म-अध्यात्म

पौराणिक एवं वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है नवरात्र

नवरात्र का पौराणिक, आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व—महिषासुर वध से लेकर नवऊर्जा, उपवास और भारतीय कालचक्र तक का विस्तृत विश्लेषण।

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futuredइतिहास

जिन्होंने मृत्यु को चुन लिया, पर धर्म नहीं छोड़ा: वीर बाल दिवस

वीर बाल दिवस पर पढ़िए गुरु गोबिंद सिंह के साहिबजादों के अद्वितीय साहस और बलिदान की प्रेरक कथा, जो बच्चों और युवाओं को धर्म, राष्ट्र और निडरता का संदेश देती है।

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futuredधर्म-अध्यात्म

युवा मन की उलझनों में भगवद्गीता का प्रकाश: कर्म, विवेक और आत्मबल का संदेश

युवा पीढ़ी की मानसिक उलझनों, तनाव और भ्रम को दूर करने में भगवद्गीता के संदेश, निष्काम कर्म, आत्मबल, सात्विक सुख और आधुनिक मनोविज्ञान के संबंध पर आधारित प्रेरक लेख।

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futuredमेरा गाँव मेरा बचपन

भारतीय संस्कृति में है पक्षी प्रेम की प्राचीन परम्परा

इन दिनों उत्तर भारत की अनेक झीलों में विचरण करते विविध प्रकार के प्रवासी पक्षी आमजन को लुभा रहे हैं । पक्षी प्रेम और संरक्षण की बहुत ही सशक्त परम्परा भारतीय समाज में प्राचीन काल से रही है। चरक संहिता, संगीत रत्नाकर और भरतमुनि के नाट्यशास्त्र में पक्षियों की चारित्रिक विशेषताओं का सुन्दर चित्रण किया गया है। मनुस्मृति व पाराशरस्मृति आदि में पक्षियों के शिकार का निषेध किया गया है।

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futuredपॉजिटिव स्टोरी

राष्ट्रसेवा से ही सार्थक जीवन : स्वामी विवेकानन्द

स्वामीजी कहते हैं- ‘देशभक्त बनो, जिस राष्ट्र ने अतीत में हमारे लिए इतने बड़े-बड़े काम किए हैं, उसे प्राणों से भी प्यारा समझो।…. भारत तभी जगेगा, जब विशाल हृदयवाले सैंकड़ों स्त्री-पुरूष भोग-विलास और सुख की सभी इच्छाओं को विसर्जित कर मन, वचन और शरीर से उन करोड़ों भारतीयों के हित के लिए सचेष्ट होंगे जो दरिद्रता तथा मूर्खता के अगाध सागर में निरन्तर डूबते जा रहे हैं।’

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futuredहमारे नायक

पूर्ण एकाग्रता से लक्ष्य साधो : स्वामी विवेकानन्द

स्वामी विवेकानन्द ने बिना कुछ कहे उस युवक के हाथ से बन्दूक ली और एक के बाद एक लगातार बारह छिलके पर सटीक निशाना लगाया। सारे युवक आश्चर्यचकित हो सोचने लगे कि स्वामी निश्चित ही वे कोई बड़े निशानेबाज हैं। स्वामी जी उनकी मनःस्थिति भाँपकर बोले – ” मैंने अपने जीवन में कभी भी गोली नहीं चलाई है बन्धु । आज ये जो निशाना ठीक लगा है उसकी सफलता का रहस्य है- पूर्ण एकाग्रता । “

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