प्रकृति और पर्यावरण के संतुलन का संदेश देता मार्गशीर्ष
भगवान कृष्ण द्वारा बताए मार्गशीर्ष मास का पर्यावरणीय और आध्यात्मिक महत्व—प्रकृति, संतुलन और कृतज्ञता का संदेश देता महीना।
Read Moreभगवान कृष्ण द्वारा बताए मार्गशीर्ष मास का पर्यावरणीय और आध्यात्मिक महत्व—प्रकृति, संतुलन और कृतज्ञता का संदेश देता महीना।
Read Moreवंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की स्वतंत्रता चेतना का प्रतीक है। बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की कलम से निकला यह राष्ट्रगीत स्वाधीनता संग्राम के दौरान जन-जन की आवाज बना। शताब्दी वर्ष पर यह गीत आज भी भारत के सांस्कृतिक गौरव, एकता और मातृभूमि-भक्ति का प्रतीक है।
Read Moreश्रीकृष्ण का वचन “मासानां मार्गशीर्षोऽहम्” केवल धार्मिक कथन नहीं, बल्कि एक पर्यावरणीय दर्शन है। जब हम इस भाव को जीवन में अपनाते हैं, तब हमारे भीतर करुणा, संतुलन और कृतज्ञता स्वतः जागृत होती है।
Read Moreआर्य समाज के प्रखर प्रचारक, राष्ट्रवादी विचारक और गदर आंदोलन के क्रांतिकारी भाई परमानंद ने राष्ट्र, संस्कृति और स्वतंत्रता के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित किया।
Read Moreआंवला नवमी के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने धर्मपत्नी कौशल्या साय के साथ आंवला वृक्ष की पूजा कर प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की। उन्होंने कहा कि आंवला वृक्ष भारतीय संस्कृति में औषधीय और आध्यात्मिक महत्व रखता है तथा वृक्षों का संरक्षण हर नागरिक का कर्तव्य है।
Read Moreगुजरात के एकता नगर में सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती पर आयोजित एकता परेड में छत्तीसगढ़ की झांकी “बस्तर की धरती – संस्कृति, सृजन और प्रगति की गाथा” ने सबका मन मोह लिया। झांकी ने जनजातीय जीवन, लोक परंपराओं और विकास की नई तस्वीर पेश करते हुए यह संदेश दिया कि बस्तर अब परंपरा और प्रगति का संतुलित प्रतीक बन चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने झांकी की सराहना की और इसे भारत की एकता और विविधता का जीवंत उदाहरण बताया।
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