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राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर विचार गोष्ठी: मीडिया की विश्वसनीयता को सबसे बड़ी शक्ति बताया

राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर जनसंपर्क संचालनालय में आयोजित विचार गोष्ठी में वरिष्ठ संपादकों, पत्रकारों और अधिकारियों ने मीडिया की विश्वसनीयता को उसके सबसे बड़े बल के रूप में रेखांकित किया। वक्ताओं ने कहा कि तकनीकी युग में भ्रामक सूचनाओं के प्रसार को रोकने के लिए पारदर्शिता, तथ्य-जांच और जिम्मेदार पत्रकारिता अत्यंत आवश्यक है। कार्यक्रम में मीडिया की भूमिका, सत्यापन की आवश्यकता और लोकतंत्र में प्रेस की अहमियत पर विस्तार से चर्चा हुई।

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futuredसम्पादकीय

डिजिटल युग में प्रेस की स्वतंत्रता और पत्रकारों की चुनौतियां

वर्तमान दौर में पत्रकारों को कई प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जो न केवल उनके पेशेवर जीवन बल्कि उनके व्यक्तिगत जीवन को भी प्रभावित करती हैं। पत्रकारों को कई बार गंभीर शारीरिक खतरों का सामना करना पड़ता है, खासकर जब वे भ्रष्टाचार, अपराध, या सत्ता के दुरुपयोग को उजागर करते हैं।

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अमर शहीद क्रांतिकारी भगत सिंह

युवता के योग्यतम प्रतीक सरदार भगत सिंह के इस महान बलिदान और त्याग ने देश के जन मानस में आजादी की ऐसी तड़प पैदा कर दी, एक ऐसी क्रांति की अलख जगा दी कि परिणाम स्वरूप देश का हर व्यक्ति आजादी की लड़ाई लड़ने के लिए, बलिदान होने के लिए स्वेच्छा से आगे आने लगा। भगत सिंह केवल एक नाम ही नहीं अपितु एक श्रेष्ठ विचारधारा हैं

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futuredहमारे नायक

एकात्म मानववाद और अंत्योदय के प्रणेता : पंडित दीनदयाल उपाध्याय

पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जीवन और दर्शन भारतीय राजनीति में महत्वपूर्ण योगदान के लिए जाना जाता है। 25 सितंबर 1916 को उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के एक गरीब ब्राह्मण परिवार में जन्मे पंडित जी ने अपने जीवन में सामाजिक सेवा और राष्ट्र की एकता के लिए संघर्ष किया

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