धार्मिक स्वतंत्रता

futuredछत्तीसगढताजा खबरें

मंदिर प्रवेश पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी, भेदभाव से समाज और धर्म दोनों को नुकसान

सुप्रीम कोर्ट ने मंदिरों में प्रवेश को लेकर कहा कि संप्रदाय के आधार पर भेदभाव समाज और धर्म दोनों के लिए हानिकारक है। अदालत ने समानता और धार्मिक परंपराओं के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया।

Read More
futuredखबर राज्यों सेताजा खबरें

सबरीमला मामले की सुनवाई में केंद्र ने PIL पर उठाए सवाल, सुप्रीम कोर्ट बोला—पहले से ही बरत रहे हैं सावधानी

सबरीमला मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने जनहित याचिकाओं (PIL) को समाप्त करने की जरूरत बताई, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अदालतें पहले ही ऐसे मामलों में काफी सतर्कता बरत रही हैं। यह बहस महिलाओं के अधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन से जुड़े बड़े संवैधानिक सवालों को सामने लाती है।

Read More
futuredछत्तीसगढताजा खबरें

घर में प्रार्थना सभा पर रोक नहीं: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी भी व्यक्ति को अपने घर में प्रार्थना सभा आयोजित करने के लिए पूर्व अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है। अदालत ने कहा कि निजी स्थान पर शांतिपूर्ण धार्मिक आयोजन करना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है, बशर्ते इससे कानून व्यवस्था प्रभावित न हो।

Read More
futuredराजनीति

डिजिटल युग का धर्मांतरण और कठोर कानून: छत्तीसगढ़ का 2026 विधेयक कितना प्रभावी?

छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026 का विश्लेषण—ओडिशा, मध्यप्रदेश और हिमाचल के कानूनों की तुलना में इसके कठोर, डिजिटल और बहुआयामी प्रावधानों की विस्तृत पड़ताल।

Read More
futuredछत्तीसगढ

छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026: अवैध धर्मांतरण पर सख्ती, कड़े दंड और पारदर्शी प्रक्रिया का प्रस्ताव

छत्तीसगढ़ कैबिनेट ने धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026 के मसौदे को मंजूरी दी। अवैध धर्मांतरण पर कड़े दंड, पूर्व सूचना और आपत्ति की प्रक्रिया सहित कई अहम प्रावधान शामिल।

Read More
futuredइतिहासहमारे नायक

अत्याचार के विरुद्ध अद्वितीय साहस का प्रतीक गुरु तेगबहादुर

गुरु तेगबहादुर का बलिदान भारतीय इतिहास कभी नहीं भूलेगा, उनका बलिदान अत्याचार के विरुद्ध डटकर मुकाबला करने का प्रेरणा देता है। जब धर्म पर बात आए तो क्रूर शासक से भी समझौता नहीं किया जा सकता चाहे अपने प्राणों का बलिदान ही क्यों न करना पड़े।

Read More