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गुरूपूर्णिमा पर राष्ट्र के प्रति समर्पण ही है सच्ची दक्षिणा

छत्रपति शिवाजी ने समर्थ गुरू रामदास के चरणों में सम्पूर्ण मराठा साम्राज्य को आततायी मुगलों से मुक्त करवाकर अर्पित कर दिया। गुरू चाणक्य ने चन्द्रगुप्त मौर्य के माध्यम से नवभारत की स्थापना का संकल्प सिद्ध किया। ऐसे अनेक उदाहरण भारतीय इतिहास में प्रत्यक्ष हैं । विविध धर्म, संप्रदाय, वर्ग, विचार से जुड़े श्रद्धालु अपने – अपने सिद्ध गुरूओं के प्रति आदरभाव अभिव्यक्त करते हुए उनका पूजन और दक्षिणा अर्पण करते हैं।

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जो आत्मवोध कराये वह गुरु है : गुरु पूर्णिमा विशेष

“जो आत्मवोध कराये वह गुरु है,  मनुष्य या प्राणी का जीवन तो सीमित होता है। समय और आयु अवस्था उनकी क्षमता और ऊर्जा को प्रभावित करती है, अतएव गुरु चिरजीवी होना चाहिए”।

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मुंगेली जिले के ग्राम अमोरा को उप तहसील के दर्जे के साथ महाविद्यालय की सौगात

वर्ष 2012 में नये जिले मुंगेली के गठन के बाद इस क्षेत्र की तस्वीर बदल गई है। गांव-गांव में सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं का विस्तार हुआ है।

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