कुटुम्ब प्रबोधन

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जहाँ सुमति तहँ संपति नाना : हमारी कुटुम्ब व्यवस्था

भारतीय संस्कृति में कुटुम्ब व्यवस्था केवल सामाजिक संस्था नहीं, बल्कि संस्कार, सुरक्षा, सहयोग और मानवीय संवेदना की आधारशिला है। कोरोना महामारी, प्राकृतिक आपदाओं और आधुनिक जीवनशैली के संदर्भ में संयुक्त परिवार की आवश्यकता और महत्व पर आधारित विचारपूर्ण आलेख।

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पंच परिवर्तनों से होगा समाज में परिवर्तन

इस पंच परिवर्तन में पांच आयाम शामिल किए गए हैं – (1) स्व का बोध अर्थात स्वदेशी, (2) नागरिक कर्तव्य, (3) पर्यावरण, (4) सामाजिक समरसता एवं (5) कुटुम्ब प्रबोधन।

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