आत्मबल

futuredधर्म-अध्यात्म

युवा मन की उलझनों में भगवद्गीता का प्रकाश: कर्म, विवेक और आत्मबल का संदेश

युवा पीढ़ी की मानसिक उलझनों, तनाव और भ्रम को दूर करने में भगवद्गीता के संदेश, निष्काम कर्म, आत्मबल, सात्विक सुख और आधुनिक मनोविज्ञान के संबंध पर आधारित प्रेरक लेख।

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सामाजिक समरसता और राष्ट्रभाव का प्रतीक तीर्थयात्राएं

इस महाकुंभ में पचास करोड़ से अधिक लोगों ने डुबकी लगा चुके हैं। सबने एक दूसरे का कंधा पकड़कर, एक दूसरे का सहयोग करके डुबकी लगाई। किसी ने किसी से जाति नहीं पूछी, अमीरी और गरीबी का भेद नहीं था, अधिकारी और सामान्य का भी भेद न था। सबकी एक ही पहचान “सनातनी हिन्दू”।

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