ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर जताई असहमति, कहा- “मैं इसे स्वीकार नहीं कर सकती”
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले पर असहमति जताई, जिसमें राज्य में सरकारी स्कूलों में 25,753 शिक्षकों और कर्मचारियों की नियुक्तियों को रद्द कर दिया गया था। ममता बनर्जी ने कहा कि वह इस निर्णय को स्वीकार नहीं कर सकतीं और इसके खिलाफ उनकी पार्टी कानूनी कदम उठाएगी।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा, “हम इस फैसले का अध्ययन कर रहे हैं। हमें न्यायपालिका का सम्मान है, लेकिन एक नागरिक के रूप में मुझे यह कहने का अधिकार है कि मैं इस फैसले को स्वीकार नहीं कर सकती। हमारी वकील इस मामले की समीक्षा करेंगे।”
ममता ने यह भी आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) राज्य के शिक्षा प्रणाली को निशाना बना रही है और इसे भाजपा और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPI(M)) द्वारा किया गया काम बताया। उन्होंने कहा, “BJP और CPI(M) ने यह सब किया है।”
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि वे नौकरी से वंचित हुए उम्मीदवारों के साथ हैं और उन्हें मानवीय आधार पर समर्थन देने का वादा किया। उन्होंने कहा, “मैं 7 अप्रैल को नेताजी इंडोर स्टेडियम में उम्मीदवारों से मिलूंगी। मैं उनके साथ हूं और अगर BJP मुझे जेल भेजना चाहती है, तो वह कर सकती है।”
इसके अलावा, ममता बनर्जी ने यह स्पष्ट किया कि जो उम्मीदवार पहले से नियुक्त हैं, उन्हें उनकी तनख्वाह लौटाने की आवश्यकता नहीं होगी।
BJP की मांग: ममता बनर्जी का इस्तीफा
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भाजपा ने ममता बनर्जी से इस्तीफा देने की मांग की। भाजपा के अध्यक्ष और केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने कहा कि इस घोटाले के लिए ममता बनर्जी जिम्मेदार हैं। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, “इस घोटाले की पूरी जिम्मेदारी ममता बनर्जी की है।”
मजूमदार ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट के फैसले से स्पष्ट हो गया है कि ममता बनर्जी के शासन में योग्य और शिक्षित बेरोजगार युवाओं की मेरिट को पैसे के बदले बेचा गया। अब कोई माफी नहीं मिलेगी।”
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल में 25,753 शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की नियुक्तियों को रद्द कर दिया और इस पूरी चयन प्रक्रिया को “धोखाधड़ी और दोषपूर्ण” करार दिया। कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार को तीन महीने के भीतर एक नया चयन प्रक्रिया शुरू करनी होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि जिन कर्मचारियों की नियुक्तियाँ रद्द की गई हैं, उन्हें अब तक प्राप्त वेतन और अन्य भत्ते वापस नहीं करने होंगे, लेकिन कुछ विकलांग कर्मचारियों को मानवीय आधार पर छूट दी जाएगी।
पश्चिम बंगाल भर्ती घोटाला मामला
यह मामला 2016 में पश्चिम बंगाल SSC द्वारा की गई भर्ती प्रक्रिया से संबंधित है, जिसमें 23 लाख उम्मीदवारों ने 24,640 पदों के लिए आवेदन किया था, लेकिन 25,753 नियुक्ति पत्र जारी किए गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने इसे “सिस्टमेटिक धोखाधड़ी” करार दिया था।
इस मामले में पूर्व पश्चिम बंगाल शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी और तृणमूल कांग्रेस के विधायक माणिक भट्टाचार्य और जीबन कृष्ण साहा सहित कई लोगों के खिलाफ जांच चल रही है।