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महाराष्ट्र में परिवहन कर्मियों की राज्यव्यापी हड़ताल, मुंबई-पुणे में सेवाएं प्रभावित होने की आशंका

महाराष्ट्र में टैक्सी चालकों, ऑटो रिक्शा संचालकों, ट्रक ड्राइवरों और अन्य परिवहन कर्मियों ने 5 मार्च को राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। इस हड़ताल का असर मुंबई और पुणे समेत कई बड़े शहरों में देखने को मिल सकता है।

यह आंदोलन महाराष्ट्र ट्रांसपोर्टर्स एक्शन कमेटी (एम-टैक) के बैनर तले विभिन्न परिवहन यूनियनों द्वारा किया जा रहा है। संगठनों का आरोप है कि राज्य में लागू ई-चालान प्रणाली ने चालकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं और जुर्माने को चुनौती देना महंगा और जटिल हो गया है।

वार्ता विफल, हड़ताल का ऐलान

यूनियन नेताओं और राज्य के परिवहन मंत्री Pratap Sarnaik के बीच हुई बातचीत बेनतीजा रहने के बाद हड़ताल की घोषणा की गई। मुंबई के Azad Maidan सहित कई स्थानों पर प्रदर्शन की योजना बनाई गई है।

कौन-कौन हैं शामिल?

इस विरोध में टैक्सी और ऑटो चालकों के अलावा ट्रक ऑपरेटर, मालवाहक वाहन चालक, स्कूल बस संचालक, कर्मचारी परिवहन बसें, पर्यटक वाहन और ऐप आधारित कैब चालक भी शामिल हैं। यूनियनों का दावा है कि परिवहन क्षेत्र का बड़ा वर्ग इस आंदोलन में भाग ले सकता है।

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ई-चालान प्रणाली पर आपत्ति

यूनियनों का कहना है कि जनवरी 2026 से लागू संशोधित नियमों के तहत चालान को चुनौती देने से पहले 50 प्रतिशत जुर्माना जमा करना अनिवार्य कर दिया गया है। उनका तर्क है कि इससे चालकों पर आर्थिक दबाव बढ़ता है और सुनवाई से पहले ही भुगतान करना पड़ता है।

साथ ही, यदि जुर्माना लंबित रहता है तो वाहन को ब्लैकलिस्ट किए जाने का खतरा रहता है, जिससे वाहन संबंधी कार्य प्रभावित होते हैं। कुछ संगठनों ने यह भी आरोप लगाया है कि एक ही दिन में एक ही उल्लंघन के लिए कई चालान जारी किए जा रहे हैं।

अन्य मांगें भी शामिल

परिवहन संगठनों ने ई-चालान के अलावा बढ़ते ईंधन कर, सड़क टोल, परमिट शुल्क और पंजीकरण शुल्क को भी मुद्दा बनाया है। उनका कहना है कि इन बढ़ती लागतों से परिवहन व्यवसाय पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है।

यूनियनों ने लंबित चालानों की समीक्षा, टोल और करों में राहत, तथा चालान और वाहन जब्ती से जुड़े मामलों के लिए विशेष न्यायाधिकरण गठित करने की मांग की है। साथ ही, ड्राइवरों के लिए बेहतर पार्किंग और विश्राम सुविधाओं की भी मांग उठाई गई है।

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क्या होगा असर?

यदि हड़ताल को व्यापक समर्थन मिलता है तो मुंबई और पुणे जैसे शहरों में दैनिक आवागमन प्रभावित हो सकता है। टैक्सी और ऑटो सेवाएं ठप होने पर अंतिम मील की यात्रा पर असर पड़ेगा, वहीं ट्रक और मालवाहक वाहन बंद रहने से आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है।

प्रशासन की ओर से स्थिति पर नजर रखी जा रही है, हालांकि परिवहन संगठनों ने अपनी मांगों पर ठोस आश्वासन मिलने तक आंदोलन जारी रखने के संकेत दिए हैं।