होर्मुज जलडमरूमध्य में राहत! भारतीय LPG टैंकर ‘पाइन गैस’ और ‘जग वसंत’ सुरक्षित रास्ते पर, कूटनीतिक प्रयासों का असर
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। पर्शियन गल्फ में फंसे दो भारतीय ध्वज वाले एलपीजी टैंकर—‘पाइन गैस’ और ‘जग वसंत’—अब आगे बढ़ चुके हैं और आज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार करने की ओर अग्रसर हैं। जहाजों की ट्रैकिंग जानकारी के अनुसार ये टैंकर ईरान के लारक और केशम द्वीपों के बीच स्थित समुद्री मार्ग के करीब पहुंच चुके हैं।
सूत्रों के मुताबिक, दोनों जहाज एक साथ आगे बढ़ रहे हैं और लगातार यह संकेत प्रसारित कर रहे हैं कि वे भारतीय जहाज हैं, ताकि पहचान को लेकर किसी प्रकार का भ्रम न हो। विशेषज्ञों का मानना है कि ये टैंकर पारंपरिक रास्ते के बजाय ईरान के क्षेत्रीय जल क्षेत्र से होकर गुजर रहे हैं, जहां तेहरान जहाजों की आवाजाही पर निगरानी और नियंत्रण बनाए हुए है।
भारत सरकार इस पूरे मामले में कूटनीतिक स्तर पर सक्रिय है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि ईरान के साथ कोई सामान्य समझौता नहीं है, बल्कि हर जहाज के लिए अलग-अलग स्तर पर बातचीत की जा रही है। इसी प्रयास के चलते कुछ दिन पहले ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ नामक टैंकर भी सुरक्षित रूप से इस मार्ग को पार कर चुके हैं।
‘जग वसंत’ जहाज को भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPCL) ने चार्टर किया है, जबकि ‘पाइन गैस’ को इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) द्वारा किराए पर लिया गया है। दोनों टैंकरों की क्षमता काफी बड़ी है और ये भारत की एक दिन की एलपीजी जरूरत के बराबर ईंधन लेकर आ रहे हैं।
गौरतलब है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज भारत के लिए बेहद अहम समुद्री मार्ग है। देश के लगभग 40 प्रतिशत कच्चे तेल, 50 प्रतिशत एलएनजी और करीब 90 प्रतिशत एलपीजी आयात इसी रास्ते से होते हैं। मौजूदा हालात में इस मार्ग पर दबाव बढ़ गया है, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता भी बनी हुई है।
बताया जा रहा है कि हाल ही में कई देशों के जहाज भी इसी वैकल्पिक और लंबा रास्ता अपनाकर सुरक्षित निकलने की कोशिश कर रहे हैं। इससे संकेत मिलता है कि ईरान कुछ शर्तों के साथ सीमित जहाजों को मार्ग देने की अनुमति दे रहा है।
फिलहाल, भारत सरकार लगातार अन्य देशों और संबंधित एजेंसियों के संपर्क में है, ताकि भारतीय जहाजों को सुरक्षित और बिना किसी बाधा के इस संवेदनशील क्षेत्र से बाहर निकाला जा सके।

