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सचिव खनिज संसाधन विभाग छत्तीसगढ़ शासन श्री पी. दयानंद की पत्रकार वार्ता

रायपुर, 15 जनवरी 2026/ सचिव खनिज संसाधन पी. दयानंद ने बताया कि छत्तीसगढ़ प्रदेश में 28 से अधिक प्रकार के खनिज विभिन्न क्षेत्रों में पाए जाते हैं। इन खनिजों के अन्वेषण और उत्खनन के लिए राज्य सरकार द्वारा खनिज ब्लॉक तैयार कर नीलामी एवं अन्य माध्यमों से खनन हेतु उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप पिछले दो वर्षों में राज्य शासन को खनिज राजस्व की प्राप्ति में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (सीएमडीसी) राज्य में अन्वेषण और खनन से जुड़े कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभा रहा है। राज्य के खनिज आधारित स्थानीय उद्योगों को खनिज आपूर्ति सुनिश्चित करने और राजस्व वृद्धि के उद्देश्य से 7 जून 2001 को सीएमडीसी का गठन किया गया था। वर्तमान में निगम माइनिंग एवं मार्केटिंग ठेका, उत्खनन ठेका, एमडीओ, अन्वेषण और संयुक्त उपक्रम जैसे विभिन्न माध्यमों से कार्य कर रहा है।

9 खनिजों में सक्रिय सीएमडीसी, टिन पर विशेष फोकस

वर्तमान में सीएमडीसी द्वारा टिन, बॉक्साइट, लौह अयस्क, कॉपर, हीरा, मैंगनीज, कोरण्डम, डोलोमाइट और कोयला सहित 9 खनिजों के खनन, विपणन और अन्वेषण का कार्य किया जा रहा है।
बस्तर अंचल में अनुसूचित जनजाति समुदाय के आजीविका संवर्धन के लिए टिन अयस्क की खरीदी विशेष रूप से की जा रही है। संयुक्त उपक्रम के माध्यम से टिन खनन और स्मेल्टर का संचालन भी किया जा रहा है। टिन को क्रिटिकल मिनरल की श्रेणी में शामिल किया गया है।

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पी. दयानंद ने बताया कि पिछले दो वर्षों में अनुसूचित जनजाति वर्ग को टिन का उचित मूल्य समय पर उपलब्ध कराने के प्रयास किए गए हैं। इसके परिणामस्वरूप टिन का क्रय मूल्य बढ़कर 1926 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया है, जो लगभग तीन गुना वृद्धि है। इससे टिन क्रय मात्रा में भी अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। ऑनलाइन क्रय और रियल टाइम भुगतान की व्यवस्था लागू है तथा इसके लिए TIN – Tribal Incentive for Natural Resources पोर्टल तैयार किया जा रहा है।

क्रिटिकल मिनरल में नई पहल

सीएमडीसी, मॉयल के सहयोग से बलरामपुर जिले में मैंगनीज और ग्रेफाइट का अन्वेषण कर रहा है, जिसके उत्साहजनक परिणाम मिले हैं। कोल इंडिया लिमिटेड और सीएमडीसी के बीच क्रिटिकल मिनरल के अन्वेषण एवं खनन को लेकर समझौता पत्र पर हस्ताक्षर हो चुके हैं। इसके क्रियान्वयन हेतु संयुक्त कार्यसमिति गठित की गई है।
यह समझौता केवल खनन तक सीमित नहीं है, बल्कि खनिज संवर्धन, प्रसंस्करण, तकनीकी सहयोग और युवाओं के लिए कौशल विकास को भी शामिल करता है।

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पारदर्शी नीलामी से रिकॉर्ड राजस्व

मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में सीएमडीसी ने MSTC के माध्यम से पारदर्शी और तकनीक आधारित नीलामी प्रक्रिया अपनाई है। लौह अयस्क की नीलामी में रिकॉर्ड उच्च बिक्री मूल्य प्राप्त हुए हैं, जबकि उत्खनन में न्यूनतम दरें हासिल हुई हैं, जो प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया की सफलता को दर्शाती हैं।

पिछले वित्तीय वर्ष में आरीडोंगरी खदान से लौह अयस्क विक्रय द्वारा राज्य शासन को लगभग 28.65 करोड़ रुपये और सीएमडीसी को लगभग 24 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ। वर्ष 2021 से 2025 तक 1.10 करोड़ रुपये सीएसआर मद में व्यय किए गए हैं।
इस खदान से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 200 से अधिक लोगों को रोजगार मिला है। उत्पादन क्षमता 5 लाख टन से बढ़ाकर 20 लाख टन प्रतिवर्ष करने की दिशा में खनन योजना तैयार की जा रही है।

बड़ी परियोजनाएं और भविष्य की योजनाएं

सीएमडीसी-एनएमडीसी संयुक्त उपक्रम एनसीएल के माध्यम से बैलाडिला डिपॉजिट-4 और डिपॉजिट-13 में शीघ्र ही खनन कार्य शुरू होगा। 2026 से उत्पादन प्रारंभ होने पर राज्य शासन को अनुमानित 7 हजार करोड़ रुपये और सीएमडीसी को 3 हजार करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होने की संभावना है।

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इसके अलावा केरवा कोल परियोजना, हीरा अन्वेषण, डोलोमाइट, कोरण्डम, कॉपर और बॉक्साइट जैसे खनिजों में भी कार्य तेजी से प्रगति पर है। भविष्य में क्रिटिकल मिनरल के लिए नए क्षेत्रों का चयन, स्लैग से धातु निष्कर्षण, सेमिनार और शोध कार्यों को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

सचिव खनिज संसाधन ने कहा कि सटीक कार्ययोजना और पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से सीएमडीसी आत्मनिर्भर भारत की दिशा में राज्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।