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छत्तीसगढ़ी लोक साहित्य संरक्षक पंडित अमृतलाल दुबे

छत्तीसगढ़ के लोक साहित्य को संरक्षित करने वाले पंडित अमृतलाल दुबे ने ‘तुलसी के बिरवा जगाय’ जैसे अमूल्य संग्रह के माध्यम से आदिवासी लोकगीतों की सांस्कृतिक विरासत को अक्षुण्ण बनाए रखा। जानिए उनके प्रेरक जीवन और साहित्यिक योगदान की कहानी।

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प्रेमचंद साहित्य की मशाल:अगासदिया संस्था ने मनाई यादगार संध्या

भिलाई स्थित साहित्यिक संस्था ‘अगासदिया’ ने प्रेमचंद जयंती की पूर्व संध्या पर ‘स्मरण-प्रेमचंद’ कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें उनकी कहानियों के छत्तीसगढ़ी अनुवाद संग्रह पर चर्चा हुई और साहित्यिक प्रभावों पर विचार रखे गए।

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डाॅ. खूबचंद बघेल जयंती पर दुर्ग में हुआ भव्य आयोजन

दुर्ग में डॉ. खूबचंद बघेल की 125वीं जयंती पर छत्तीसगढ़ भ्रातृ संघ व मनवा कूर्मि समाज द्वारा भव्य समारोह आयोजित किया गया, जिसमें उनके विचारों, साहित्यिक योगदान व राज्य निर्माण आंदोलन पर चर्चा हुई।

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शुभदा पाण्डेय की काव्यात्मा पुस्तक ‘महाकुंभ के माणिक मृगमन’ पर एक समीक्षात्मक दृष्टि

शुभदा जी की सद्यः प्रकाशित पुस्तक ‘महाकुंभ के माणिक मृगमन’ गंगा, महाकुंभ और आस्था के अद्भुत संगम की काव्यात्मक और संवेदनात्मक यात्रा है, जिसमें 28 कविताएं, 2 आलेख और छायाचित्रों के माध्यम से आध्यात्मिक अनुभवों को संजोया गया है।

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छत्तीसगढ़ी व्यंग्य संग्रह ‘कलंकपुर के कलंक’ का विमोचन, काव्य गोष्ठी और वृक्षारोपण भी संपन्न

भिलाई में साहू मित्र सभा द्वारा डॉ. दीनदयाल साहू के छत्तीसगढ़ी व्यंग्य संग्रह ‘कलंकपुर के कलंक’ का विमोचन हुआ, काव्य गोष्ठी और वृक्षारोपण भी सम्पन्न।

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पंडित रामदयाल तिवारी: छत्तीसगढ़ के भूले-बिसरे साहित्यिक नायक

पंडित रामदयाल तिवारी छत्तीसगढ़ के एक ऐसे साहित्यकार थे, जिनका लेखन जनजीवन, संस्कृति और आत्मसंघर्ष की जीवंत झलक देता है। यह आलेख उनके व्यक्तित्व, विचार और विरासत को सामने लाता है।

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