हिन्दी नवजागरण के शिल्पकार भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
भारतेन्दु हरिश्चन्द्र का जीवन, हिन्दी नवजागरण में उनका योगदान, नाटक, कविता, पत्रकारिता और “भारतेन्दु युग” की ऐतिहासिक भूमिका पर आधारित विस्तृत आलेख।
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Read Moreछत्तीसगढ़ी भाषा के प्रथम नाटककार पंडित लोचन प्रसाद पाण्डेय का जीवन, साहित्यिक योगदान, इतिहास व पुरातत्व में उनकी भूमिका और छत्तीसगढ़ी साहित्य में उनका स्थान।
Read Moreनववर्ष 2026 के पहले दिन साहित्यकार नारायण लाल परमार, संत कवि पवन दीवान और वरिष्ठ पत्रकार चन्दूलाल चन्द्राकर की जीवन-यात्रा को स्मरण करता विशेष आलेख।
Read Moreमहाकवि सुभ्रमण्या भारती: तमिल साहित्य के नवजागरणकर्ता, स्वतंत्रता सेनानी और स्त्री सशक्तिकरण के प्रणेता। उनकी राष्ट्रभक्ति कविताएँ आज भी प्रेरणा स्रोत हैं।
Read Moreछत्तीसगढ़ में पत्रकारिता का इतिहास 125 वर्षों से अधिक पुराना है, जिसकी नींव वर्ष 1900 में पंडित माधवराव सप्रे द्वारा पेंड्रा से प्रकाशित ‘छत्तीसगढ़ मित्र’ ने रखी। यह वही बीज था, जो आज एक विशाल पत्रकारिता-वृक्ष के रूप में विकसित हो चुका है।
Read Moreश्रीकृष्ण का वचन “मासानां मार्गशीर्षोऽहम्” केवल धार्मिक कथन नहीं, बल्कि एक पर्यावरणीय दर्शन है। जब हम इस भाव को जीवन में अपनाते हैं, तब हमारे भीतर करुणा, संतुलन और कृतज्ञता स्वतः जागृत होती है।
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