समाज

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सत्य के साहसी साधक और धर्मनिरपेक्षता के विवेचक : सीताराम गोयल

1946 में मुस्लिम लीग के डायरेक्ट एक्शन में नर संहार देखकर उनका मन उद्वेलित हो गया। वह नरसंहार एकतरफा था। उनका मानना था कि साम्यवाद को इस नरसंहार का विरोध करना चाहिए, पर ईसाई और साम्यवादी तंत्र ने उस हिंसा के विरुद्ध कोई आवाज नहीं उठाई। यह हिंसा भारत विभाजन तक जारी रही। यहाँ से उनका मन बदला।

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अर्थशास्त्र, धर्म और पर्यावरण: भारतीय परंपराओं का वैज्ञानिक दृष्टिकोण

भारत में वेदों, पुराणों एवं शास्त्रों में यह कहा गया है कि मानव जीवन हमें मोक्ष प्राप्त करने के लिए प्राप्त हुआ है। मोक्ष प्राप्ति के लिए अच्छे कर्मों का करना आवश्यक है। अच्छे कर्म अर्थात हमारे किसी कार्य से किसी पशु, पक्षी, जीव, जंतु को कोई दुःख नहीं पहुंचे एवं सर्व समाज की भलाई के कार्य करते रहें।

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भारत में ग्रामीण विकास की नई दिशा एवं आर्थिक प्रगति और रोजगार के अवसर

आज भारत में केवल मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई, बैंगलोर, हैदराबाद, पुणे जैसे महानगर ही देश के विकास में भागीदारी नहीं कर रहे हैं बल्कि ग्रामीण इलाकों में भी पर्याप्त विकास हो रहा है।

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बच्चों के अधिकारों और उज्ज्वल भविष्य का संकल्प : अंतर्राष्ट्रीय बाल दिवस

भारत में बच्चों की स्थिति पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न क्षेत्रों में सुधार की ओर बढ़ी है, लेकिन चुनौतियाँ अब भी मौजूद हैं। 2014 के बाद, बच्चों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए सरकार ने कई योजनाएँ और नीतियाँ लागू कीं, जिनसे कुछ सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं।

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एक और उलगुलान-डी-लिस्टिंग के सूत्रधार जनजातीय उद्धारक बाबा कार्तिक उरांव

ऐसे में यह प्रश्न उठता है कि वह जनजातीय कहां रह जाता है? वह तो ईसाई बन जाता है। फिर ऐसे व्यक्ति को आरक्षण इत्यादि का लाभ क्यों मिले? यही यक्ष प्रश्न आज भी खड़ा हुआ है।

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हर घटना की एक ही कहानी : लव जिहाद

तब कुछ स्वर ऐसे थे कि वहाँ मंदिर के स्थान पर अस्पताल बनना चाहिए। लेकिन जब एक लड़की को कोई धोखा देता है, नाम और पहचान बदलकर संपर्क बढ़ाता है, अपने प्रेम जाल में फँसाकर शारीरिक संबंध बनाता है और लड़की के गर्भवती होने पर अपनी असली पहचान दिखाकर धर्मान्तरण का दबाव बनाता है।

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