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तीन साल बाद खुला कानन पेंडारी जू, पर्यटक फिर से देख सकेंगे भालुओं का दीदार

कानन पेंडारी जू में तीन साल बाद पर्यटक भालुओं को देख सकेंगे। अक्टूबर 2021 में आईसीएच वायरस के संक्रमण के कारण सभी भालुओं को क्वारंटाइन कर दिया गया था। अब नया केज और नाइट सेल्टर केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण के मापदंडों के अनुसार बनकर तैयार हो गया है।

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‘घुमक्कड़ जंक्शन’ स्मारिका का हुआ लोकार्पण

विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के अरण्य भवन में  प्रधान मुख्य वनसंरक्षक श्रीनिवास राव द्वारा ‘घुमक्कड़ जंक्शन’ पत्रिका के लोकार्पण हुआ। यह पत्रिका विशेष रूप से पर्यटन और यात्रा प्रेमियों के लिए समर्पित है, जिसका उद्देश्य स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर पर्यटन को बढ़ावा देना है।

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‘घुमक्कड़ जंक्शन’ स्मारिका का हुआ लोकार्पण

विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के अरण्य भवन में  प्रधान मुख्य वनसंरक्षक श्रीनिवास राव द्वारा ‘घुमक्कड़ जंक्शन’ पत्रिका के लोकार्पण हुआ। यह पत्रिका विशेष रूप से पर्यटन और यात्रा प्रेमियों के लिए समर्पित है, जिसका उद्देश्य स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर पर्यटन को बढ़ावा देना है।

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आतंकी घटनाओं पर विवादित पुस्तकें और बयान: पाकिस्तान को बचाने का अभियान

पुलिस अगले दिन फिर मदरसा पहुँची। इस बार आपत्तिजनक सामग्री मिली। यह सामग्री भारत में कट्टरपंथ फैलाने वाली थीं। इनमें एक पुस्तक ऐसी भी मिली जिसमें भारत में घटी कुछ बड़ी आतंकी घटनाओं के लिये पाकिस्तान को क्लीनचिट दी गई और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को आतंकवादी संगठन बताकर इनका जिम्मेदार बताया गया।

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मधुमेह और इंसुलिन से जुड़े कलंक को मिटाने की चुनौती

कभी फुर्सत निकालकर गूगल सर्च पर दो शब्द टाइप करें-‘टाइप वन डायबिटीज’ और ‘सुसाइड’। सर्च रिजल्ट की जो लंबी सूची स्क्रीन पर उभरेगी, वह आपको चौंका देगी। पता लगेगा कि एक अदद बीमारी भी इन्सान को इतने अवसाद और भय से भर सकती है कि वह मौत को ही गले लगा ले। पहेली मगर यह है कि जिस बीमारी का पुख्ता इलाज दशकों पहले खोजा जा चुका, वह आज भी इस कदर डरावनी और मारक क्यों है?

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futuredविविधस्वास्थ्य

ॠतुओं के अनुसार भोजन करें और स्वस्थ रहें

हमारे पूर्वज स्वस्थ रहा करते थे एवं प्रसन्नता से अपनी पूरी उम्र जी कर जाते थे। आज व्याधियों के कारण अकाल मृत्यू का प्रतिशत बढ गया है। हम तीस चालिस बरस पीछे का हमारा जीवन देखें तो हम हमेशा ॠतु में होने वाली उपज का ही सेवन करते थे। भारत में वर्षा, शीत एवं ग्रीष्म तीन प्रमुख ॠतुएं होती हैं। वर्षाकाल में हरी सब्जियों का सेवन नहीं किया जाता था। ग्रीष्म ॠतु में ही वर्षाकाल के भोजन की तैयारी कर ली जाती थी।

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