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एक ऐसा यंत्र जिसके बिना निर्माण कार्य प्राचीन काल में संभव नहीं था।

चूना पत्थर फ़ोड़ने पर घड़ घड़ की ध्वनि निकलने के कारण इसका नामकरण घराट हो गया। जब मनुष्य ने विकास के पायदान पर भवन निर्माण में चूने का महत्व जाना तो उसे मिलाने के “घरट” नामक यंत्र का अविष्कार किया।

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क्या आप जानते हैं कि रुपसूत्र किस विषय का ग्रंथ था

‘रूप’ शब्द का प्रयोग मूर्ति के अर्थ में मध्यकाल में मिलता है क्योंकि सूत्रधार मंडन ने 1450 ईस्वी में ‘रूपमंडन’ और सूत्रधार नाथा ने 1480 में “रूपाधिकार” नाम से मूर्तिकला पर ग्रंथ रचे। (वास्तुमंजरी : नाथाकृत, संपादक श्रीकृष्ण जुगनू) हालांकि अष्टाध्यायी में पाणिनि ने रूप शब्द का प्रयोग बताया है ( 5, 2, 120) तथा उससे बने ‘रूप्य’ शब्द का अभिप्राय ‘सुंदर’ एवं ‘आहत’ यानी मुहर युक्त बताया है।

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प्रकृति का अनुपम उपहार छत्तीसगढ़ : संदर्भ यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल

छत्तीसगढ़, भारत के हृदय में बसा एक सम्पन्न राज्य है, जो सांस्कृतिक विरासत और मनोरम प्राकृतिक परिदृश्यों के एक समृद्ध

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डूंगरपुर नगर के स्थापत्य का विशिष्ठ अंग गोखड़े

दुर्ग, महल, हवेलियों तथा भवनों में गोखडे अथवा झरोखे का निर्माण मध्यकालीन भारतीय स्थापत्य का महत्वपूर्ण अंग रहा है तथा

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सिरपुर साडा टीम का समर्पण और सावधानीपूर्वक प्रयास सराहनीय : डॉ. प्रवीण कुमार मिश्रा

प्राचीन लक्ष्मण मंदिर एवं आसपास के आकर्षणों को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल की सूची में नामांकित कराने के लिए किये गया प्रयासों के तहत, एक डोजियर की तैयारी के लिए विशेषज्ञ मार्गदर्शन प्रदान करने के प्राथमिक उद्देश्य के साथ, सिरपुर साडा के विनयपूर्ण निमंत्रण पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई), संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सम्मानित संयुक्त महानिदेशक (अन्वेषण एवं उत्खनन) डॉ. प्रवीण कुमार मिश्रा द्वारा सिरपुर का दौरा किया गया।

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अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस पर महंत घासीदास स्मारक में पुरानिधि दर्शन

रायपुर, छत्तीसगढ़, 18 मई, 2024 – अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस के अवसर पर, पर्यटन मंत्रालय, छत्तीसगढ़ नोडल कार्यालय, रायपुर के सहयोग से ‘हेरिटेजवाला’ और ‘प्रोजेक्ट गेटआउट’ द्वारा महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय में एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

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