धर्म-अध्यात्म

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इस दिन भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना के लिए मौन रहकर तपस्या की

मौनी अमावस्या का महत्व केवल धार्मिक और आध्यात्मिक ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी है। यह दिन अमावस्या का दिन होता है, जब चंद्रमा और सूर्य एक ही राशि में होते हैं। इस खगोलीय घटना का प्रभाव पृथ्वी पर पड़ता है और नदियों तथा समुद्र में ज्वार-भाटे उत्पन्न होते हैं।

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सामाजिक समरसता और भारतीय सांस्कृतिक एकता का महोत्सव महाकुंभ

भारत के इतिहास में जहाँ तक दृष्टि जाती है कुंभ के आयोजन का संदर्भ मिलता है। मौर्यकाल में भी और शुंग काल में भी। गुप्तकाल में तो कुंभ का बहुत विस्तार से वर्णन मिलता है। गुप्तकाल के इस विवरण में ग्रहों की स्थिति के अनुसार कुंभ के आयोजन का उल्लेख है।

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ऐसे जोगी जो सिर्फ़ संन्यासियों से ही दान लेते हैं

जंगम साधु कुंभ मेले का एक अनिवार्य अंग हैं। उनकी अनूठी परंपराएं, भजन, और वेशभूषा भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं की धरोहर हैं। उनका शिव भक्ति में लीन जीवन और समाज को दिया गया अध्यात्मिक संदेश आज भी प्रेरणादायक है। कुंभ मेले में उनकी उपस्थिति इसे और अधिक दिव्य और पवित्र बनाती है।

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जानिए नागा साधुओं के रहस्यमय लोक को

नागा साधु केवल धर्म प्रचारक ही नहीं, बल्कि समाज के रक्षक भी हैं। वे न केवल सनातन परंपराओं की रक्षा करते हैं, बल्कि समाज में धर्म और नैतिकता का प्रचार भी करते हैं। हालांकि, वर्तमान में समाज में कुप्रथाओं और विकृतियों के कारण संत समाज को भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

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श्रीराम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा है हिंदू जागरण का शंखनाद

श्री राम मंदिर निर्माण का संघर्ष और उसकी सफलता हिंदू समाज के लिए एक युगांतकारी घटना है। इसने समाज को जागरूक, संगठित और प्रेरित किया है। वैश्विक पटल पर राम मंदिर ने भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर को सुदृढ़ किया है। यह मंदिर न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि भारतीयता और एकता का प्रतीक भी है।

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आस्था, संस्कृति और आर्थिक विकास का संगम महाकुंभ 2025

हिंदू सनातन संस्कृति के अनुसार कुंभ मेला एक धार्मिक महाआयोजन है जो 12 वर्षों के दौरान चार बार मनाया जाता है। कुंभ मेले का भौगोलिक स्थान भारत में चार स्थानों पर फैला हुआ है और मेला स्थल चार पवित्र नदियों पर स्थित चार तीर्थस्थलों में से एक के बीच घूमता रहता है

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