लोक-संस्कृति

futuredधर्म-अध्यात्मलोक-संस्कृति

आध्यात्मिकता और प्रकृति सौंदर्य का उत्सव शरद पूर्णिमा

भारतीय संस्कृति मे शरद ॠतु का महत्व यहाँ के जन जीवन में स्पष्ट रुप से परिलक्षित होता है। वर्षा के बीतने के पश्चात दशहरे एवं दीवाली का त्यौहार मनुष्य के जीवन में नव उल्लास एवं नव संचार लेकर आता है, जो जीवन क्षमता में वृद्धि करता है, क्योंकि प्रकृति उल्लास एवं उमंग का ही पर्याय है। प्रकृति हमें सह अस्तित्व के साथ जीना सिखाती है और वसुधा, वसुंधरा होकर चराचर जगत के जीवों के लिए अपना सर्वस्व अर्पण कर देती है।

Read More
futuredलोक-संस्कृति

फसल उत्सव करमा नृत्य और जैव विविधता का महत्व

करमा नृत्य के बारे में कई पौराणिक कहानियाँ और धार्मिक धारणाएँ प्रचलित हैं। इसका संबंध ‘करम’ देवता से जोड़ा जाता है, जिन्हें कर्म का प्रतीक माना जाता है। करम देवता की पूजा फसलों की अच्छी पैदावार और परिवार की खुशहाली के लिए की जाती है।

Read More
futuredलोक-संस्कृति

नुआखाई और ऋषि पंचमी का सांस्कृतिक महत्व

ॠषि पंचमी को मनाया जाने वाला त्योहार नुआखाई ओडिशा और छत्तीसगढ़ की समृद्ध कृषि संस्कृति का महत्वपूर्ण पर्व है। यह पर्व नई फसल के स्वागत के साथ-साथ भगवान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का एक माध्यम है। नुआखाई का उत्सव ग्रामीण समाज के बीच सामाजिक एकता और संस्कृति का प्रतीक है। इसके साथ ऋषि पंचमी महिलाओं के लिए आत्मशुद्धि और प्रायश्चित का पर्व है। सप्तऋषियों की पूजा के माध्यम से यह पर्व नारी शक्ति के आध्यात्मिक और सामाजिक उत्थान का प्रतीक है।

Read More