छत्तीसगढ़ का रंगमंचीय साहित्य अतीत से वर्तमान तक : रविवारीय विशेष
छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति, चंदैनी गोंदा, पंडवानी परंपरा और हबीब तनवीर जैसे महान रंगकर्मियों के योगदान पर आधारित विस्तृत आलेख।
Read Moreछत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति, चंदैनी गोंदा, पंडवानी परंपरा और हबीब तनवीर जैसे महान रंगकर्मियों के योगदान पर आधारित विस्तृत आलेख।
Read Moreदक्षिण बस्तर की दोरला जनजाति में प्रचलित राम पूजा की परंपरा, देवगुड़ी आस्था, पण्डुम पर्व और दण्डकारण्य से जुड़े सांस्कृतिक एवं धार्मिक संबंधों का विस्तृत विवरण।
Read More“यदि वन न रहें तो…” विषय पर यह भावनात्मक और तथ्यात्मक आलेख जंगल में चलते एक व्यक्ति के आत्मसंवाद के माध्यम से वन संरक्षण, जनसंख्या दबाव और भविष्य की चुनौतियों को प्रस्तुत करता है।
Read Moreयह लेख पश्चिम बंगाल की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों, चुनावी माहौल और सामाजिक बदलावों पर गंभीर सवाल उठाता है। लेखक का कहना है कि राजनीतिक टकराव, हिंसा और आरोप-प्रत्यारोप के बीच बंगाल का लोकतांत्रिक वातावरण प्रभावित हो रहा है और राज्य के सामाजिक व आर्थिक भविष्य को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं।
Read Moreनज़र दोष या बुरी नज़र की अवधारणा भारतीय परंपरा से लेकर तुर्की, ग्रीस, मध्य पूर्व और लैटिन अमेरिका तक फैली हुई है। यह आलेख नज़र से जुड़ी मान्यताओं, घरेलू उपायों और वैश्विक सांस्कृतिक संदर्भों को मानवीय दृष्टिकोण से प्रस्तुत करता है।
Read Moreसाहू समाज की आराध्य देवी भक्त शिरोमणि माता कर्मा के जीवन, भक्ति, सेवा, संघर्ष और सामाजिक समरसता के संदेश पर आधारित विस्तृत भावनात्मक व तथ्यात्मक आलेख।
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