Author: News Editor

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खेलत अवधपुरी में फाग, रघुवर जनक लली

होली हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। भारतीय संस्कृति का अनूठा संगम उनकी त्योहारों और पर्वो में दिखाई देता है। इन पर्वो में न जात होती है न पात, राजा और रंक सभी एक होकर इन त्योहारों को मनाते हैं। सारी कटुता को भूलकर अनुराग भरे माधुर्य से इसे मनाते हैं। इसीलिए होली को एकता, समन्वय और सदभावना का राष्ट्रीय पर्व कहा जाता है।

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केंद्रीय सरकार ने लोकसभा में पेश किया “इमिग्रेशन और फॉरेनर्स बिल, 2025”

केंद्रीय सरकार ने लोकसभा में “इमिग्रेशन और फॉरेनर्स बिल, 2025” पेश किया है, जिसका उद्देश्य भारत की सीमाओं को मजबूत करना और विदेशी नागरिकों से संबंधित कानूनों को व्यवस्थित करना है। इस बिल के तहत पुराने कानूनों को निरस्त कर एक नया समग्र कानून लागू किया जाएगा, जिससे विदेशी नागरिकों के प्रवेश, निकासी और अन्य प्रक्रियाओं को नियंत्रित किया जाएगा। हालांकि, बिल को लेकर विपक्ष ने आलोचना की है, जिसमें इसे बुनियादी अधिकारों का उल्लंघन करार दिया गया है।

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ईरान ने अमेरिका को दी कड़ी चेतावनी, राष्ट्रपति ट्रंप को कहा “जो करना है करो” – परमाणु समझौते पर बातचीत से इनकार

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने कहा कि अमेरिका से धमकियों के तहत कोई बातचीत नहीं होगी, और राष्ट्रपति ट्रंप को कहा, “जो करना है करो।” यह बयान ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनी की टिप्पणी के एक दिन बाद आया, जिसमें उन्होंने तेहरान को धमकियों से बातचीत के लिए मजबूर करने से इनकार किया था।

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भूपेश बघेल के घर पर ED छापे के बाद अधिकारी की कार पर हमला, पुलिस ने मामला दर्ज किया

भूपेश बघेल के भिलाई स्थित आवास पर ED के छापे के बाद, कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया और सनी अग्रवाल ने एक ED अधिकारी की कार पर पत्थर फेंका, जिससे कांच टूट गया। इस मामले में पुलिस ने सनी अग्रवाल और 20 अन्य के खिलाफ FIR दर्ज की है।

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की ‘भारत’ को प्राथमिकता देने की अपील: ‘इंडिया’ नहीं, केवल ‘भारत’ होना चाहिए देश का नाम

RSS ने देश के नाम को लेकर फिर से बहस छेड़ी है, जिसमें महासचिव दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि देश का नाम ‘भारत’ होना चाहिए, न कि ‘इंडिया’। उनका तर्क है कि भारतीय भाषाओं में इसे ‘भारत’ ही कहा जाता है, और यह नाम संविधान में भी उल्लेखित है। उन्होंने कहा कि ‘भारत’ को ही राष्ट्रीय पहचान के रूप में अपनाना चाहिए।

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सामाजिक समरसता और राष्ट्रभाव का प्रतीक तीर्थयात्राएं

इस महाकुंभ में पचास करोड़ से अधिक लोगों ने डुबकी लगा चुके हैं। सबने एक दूसरे का कंधा पकड़कर, एक दूसरे का सहयोग करके डुबकी लगाई। किसी ने किसी से जाति नहीं पूछी, अमीरी और गरीबी का भेद नहीं था, अधिकारी और सामान्य का भी भेद न था। सबकी एक ही पहचान “सनातनी हिन्दू”।

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