Author: News Editor

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गोंड संस्कृति की सात्विकता पर प्रहार: राजनीति के लिए पवित्र परंपराओं का अवमूल्यन

गोंड संस्कृति की सात्विक परंपराओं, प्रकृति-पूजा, देवस्थलों की पवित्रता और आदिवासी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित विश्लेषण। जानिए कैसे राजनीतिक हस्तक्षेप और वैचारिक संघर्ष के आरोपों के बीच सांस्कृतिक मूल्यों पर बहस खड़ी हुई है।

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वास्तविक गोंड संस्कृति पर प्रहार: रूढ़ि-परंपरा की आड़ में नए देवताओं और रीतों का घालमेल

बालोद के तुएगोंडी-पाटेश्वर धाम विवाद के बहाने आदिवासी संस्कृति, गोंड परंपराओं, मूर्ति पूजा, गौरी-गौरा उत्सव और सांस्कृतिक पहचान पर उठते सवालों का विश्लेषण। जानिए मूल परंपराओं और नए वैचारिक विमर्श के बीच चल रहे संघर्ष की पड़ताल।

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भ्रामक नैरेटिव का सच: मूर्ति स्थापना से लेकर विसर्जन तक, सब आदिवासी समाज का ही निर्णय

बालोद के तुएगोंडी-पाटेश्वर धाम विवाद की वास्तविकता पर आधारित विश्लेषण। जानिए कैसे मूर्ति स्थापना और उससे जुड़े निर्णय स्थानीय आदिवासी समाज के थे तथा बाहरी संगठनों द्वारा फैलाए गए भ्रामक नैरेटिव और राजनीतिक एजेंडे पर उठते सवाल।

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futuredधर्म-अध्यात्म

ऋषि परंपरा में योग और संगीत दो पूरक धाराएँ

विश्व योग दिवस और विश्व संगीत दिवस के अवसर पर जानिए ऋषि परंपरा में योग और संगीत के गहरे संबंध को। नाद ब्रह्म, सामवेद, ओंकार, नादयोग और भारतीय आध्यात्मिक साधना के माध्यम से दोनों के अद्वैत स्वरूप का विश्लेषण।

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futuredपुस्तक समीक्षा

तीन पीढ़ियों की कविताओं का जीवंत कोलाज : ‘पूरी रंगत के साथ’

छत्तीसगढ़ के 38 कवियों की प्रतिनिधि रचनाओं से सुसज्जित साझा कविता संकलन ‘पूरी रंगत के साथ’ पर स्वराज्य करुण की पुस्तक समीक्षा। यह आलेख छत्तीसगढ़ की तीन साहित्यिक पीढ़ियों, उनके रचनात्मक योगदान तथा क्षेत्रीय साहित्यिक इतिहास की महत्वपूर्ण झलक प्रस्तुत करता है।

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बालोद विवाद: ‘स्थानीय आदिवासी बनाम बाहरी राजनीति’ की जमीनी हकीकत

बालोद जिले के तुएगोंडी-पाटेश्वर धाम विवाद की जमीनी पड़ताल। क्या यह वास्तव में आदिवासी आंदोलन है या बाहरी राजनीतिक हस्तक्षेप? स्थानीय 12 गांवों में से 11 गांवों की राय और विवाद के विभिन्न पहलुओं का विश्लेषण।

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