Author: News Editor

futuredधर्म-अध्यात्म

सनातन संस्कृति और पुराणों में कछुओं का महत्व

सनातन संस्कृति में कछुआ केवल एक जीव नहीं, बल्कि स्थिरता, धैर्य, दीर्घायु और ब्रह्मांडीय संतुलन का प्रतीक माना गया है। जानिए कूर्म अवतार, गीता, पुराण, वास्तु और योगशास्त्र में कछुए की आध्यात्मिक एवं दार्शनिक महत्ता।

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futuredमनकही

तिलचट्टों भारत कोई इंस्टाग्राम रील नहीं

“तिलचट्टों भारत कोई इंस्टाग्राम रील नहीं” व्यंग्य में सोशल मीडिया आधारित अराजक राजनीति, डिजिटल क्रांति के भ्रम और भारतीय लोकतंत्र की गहरी जड़ों पर तीखा कटाक्ष प्रस्तुत किया गया है।

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futuredधर्म-अध्यात्म

विश्वशांति में भारत की भूमिका-1

युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य के विचारों के माध्यम से जानिए कि भविष्य के वैश्विक परिदृश्य में भारत किस प्रकार आध्यात्मिक चेतना, नैतिक नेतृत्व और विश्व कल्याण की महती भूमिका निभाने वाला है।

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futuredविविध

क्या जैव विविधता का नाश मानव स्वास्थ्य के लिए बन रहा है सबसे बड़ा खतरा ?

क्या जैव विविधता का ह्रास सीधे मानव स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है? वेदों और पुराणों की दृष्टि से जानिए प्रकृति, रोग और जीवन के गहरे संबंध को समझने का वैज्ञानिक आधार।

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futuredलोक-संस्कृति

वेदों और पुराणों में प्रकृति संरक्षण की अवधारणा : जैव विविधता दिवस विशेष

वेदों और पुराणों में निहित प्रकृति संरक्षण की अवधारणा आज के पर्यावरण संकट के समाधान का मार्ग दिखाती है। जानिए कैसे भारतीय परंपरा में जैव विविधता, संतुलन और सतत विकास का गहरा संबंध है।

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futuredविविध

ऐसी दीवानगी देखी नहीं कहीं…! अंग्रेज़ों के दीवाने राजा राममोहन रॉय

राजा राममोहन राय की जयंती पर यह आलेख अंग्रेज़ी शिक्षा, मैकॉले नीति, उपनिवेशवादी मानसिकता और भारतीय ज्ञान परंपरा पर गंभीर प्रश्न उठाता है। क्या आधुनिकता के नाम पर भारतीय सभ्यता की जड़ों को कमजोर किया गया?

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