Author: News Editor

futuredसमाज

सभ्यता की दौड़ में खोती मानवीय संवेदनाएँ

यह आलेख पाश्चात्य भोगवादी संस्कृति, उपभोक्तावाद, पारिवारिक विघटन और सामाजिक चुनौतियों का विश्लेषण करते हुए भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों एवं सुसंस्कारों की आवश्यकता पर प्रकाश डालता है।

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futuredविश्व वार्ता

पर्यावरण संकट को लेकर हमारी चुप्पी: शर्मनाक भी और खतरनाक भी!

विश्व पर्यावरण दिवस के संदर्भ में पर्यावरण संकट, जंगलों की कटाई, प्लास्टिक प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और मानव की बढ़ती उदासीनता पर केंद्रित यह विचारोत्तेजक आलेख प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए सामूहिक जनभागीदारी का आह्वान करता है।

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futuredलोक-संस्कृति

भारतीय चिंतन की त्रिवेणी : एक पेड़ माँ के नाम – विश्व पर्यावरण दिवस विशेष

एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान भारतीय संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण और मातृत्व के भाव का अद्भुत संगम है। जानिए कैसे वृक्षारोपण को जनआंदोलन बनाकर यह पहल प्रकृति, संस्कृति और आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारे दायित्व का संदेश देती है।

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futuredसमाज

क्यों जरूरी है बच्चों के लिए पर्यावरण शिक्षा?

बच्चों में पर्यावरण शिक्षा और प्रकृति से जुड़ाव क्यों आवश्यक है? जानिए कैसे बचपन में विकसित पर्यावरणीय चेतना, लोक परंपराएं और प्रकृति का अनुभव आने वाली पीढ़ियों को जिम्मेदार, संवेदनशील और पर्यावरण संरक्षक नागरिक बना सकता है।

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futuredलोक-संस्कृति

प्रकृति संरक्षण की प्राचीन पाठशाला है हमारा कुटुम्ब

भारतीय लोक संस्कृति, परिवार, लोककथाएँ, त्योहार और प्रकृति-पूजा किस प्रकार बच्चों में पर्यावरण संरक्षण के संस्कार विकसित करते हैं, जानिए इस प्रेरक आलेख में।

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futuredखबर राज्यों से

संघ में आइये देखिए समझिए, केवल दर्शक मत बने रहिए : डॉ. मोहन भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता विकास वर्ग-द्वितीय के समापन समारोह में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने भारत के वैश्विक नेतृत्व, हिन्दू समाज के संगठन और राष्ट्र निर्माण पर विचार रखे। प्रमुख अतिथि कुमार मंगलम बिड़ला ने आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के संकल्प को नई दिशा देने का आह्वान किया।

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