अमेरिका-ईरान तनाव: ट्रंप का 15 सूत्रीय सीजफायर प्रस्ताव, बातचीत की नई कोशिश
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान को 15 बिंदुओं वाला सीजफायर प्रस्ताव भेजा है। यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब अमेरिका, इजराइल के समर्थन के साथ, ईरान के साथ करीब एक महीने से चल रहे टकराव में उलझा हुआ है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह प्रस्ताव पाकिस्तान के माध्यम से तेहरान तक पहुंचाया गया है। Asim Munir, जो पाकिस्तान के सेना प्रमुख हैं, इस पूरे संवाद में एक अहम कड़ी के रूप में उभरे हैं। पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच वार्ता की मेजबानी करने की भी पेशकश की है।
प्रस्ताव के मुख्य बिंदु
हालांकि 15 सूत्रीय योजना का पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार इसमें ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम पर विशेष फोकस है। प्रस्ताव में एक महीने का युद्धविराम कर बातचीत शुरू करने की बात कही गई है।
इसके अलावा प्रमुख शर्तों में शामिल हैं:
- ईरान के परमाणु हथियार कार्यक्रम को पूरी तरह समाप्त करना
- यूरेनियम संवर्धन (एनरिचमेंट) रोकना
- International Atomic Energy Agency (IAEA) को परमाणु ठिकानों तक पूर्ण पहुंच देना
- नतांज, इस्फहान और फोर्डो जैसे प्रमुख परमाणु केंद्रों को खत्म करना
- मिसाइल कार्यक्रम की सीमा और संख्या पर नियंत्रण
- क्षेत्रीय सहयोगी संगठनों को समर्थन बंद करना
साथ ही, वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अहम Strait of Hormuz को खुला रखने की भी शर्त रखी गई है, जो इस समय बंद होने से अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर असर डाल रहा है।
अमेरिका की ओर से पेशकश
अगर ईरान इस प्रस्ताव को स्वीकार करता है, तो अमेरिका ने कई रियायतें देने का संकेत दिया है। इनमें सभी आर्थिक प्रतिबंध हटाना, ईरान के नागरिक परमाणु कार्यक्रम में सहयोग और “स्नैपबैक” प्रतिबंध प्रणाली को खत्म करना शामिल है।
ईरान का सख्त रुख
वहीं, ईरान ने फिलहाल इस प्रस्ताव पर नरमी नहीं दिखाई है। ईरानी सैन्य नेतृत्व के प्रवक्ता Ali Abdollahi Aliabadi ने कहा कि लड़ाई “पूर्ण जीत” तक जारी रहेगी।
हालांकि, रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान ने भी युद्ध समाप्त करने के लिए कुछ शर्तें रखी हैं, जिनमें तत्काल युद्धविराम, भविष्य में अमेरिकी हमलों की गारंटी, नुकसान की भरपाई, और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण शामिल हैं।
क्षेत्र में तनाव बरकरार
इस बीच, इजराइल और अमेरिका लगातार ईरान के मिसाइल ठिकानों और सैन्य ढांचे को निशाना बना रहे हैं, जबकि ईरान भी जवाबी हमले जारी रखे हुए है। ऐसे में यह प्रस्ताव क्षेत्र में शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण लेकिन चुनौतीपूर्ण कदम माना जा रहा है।

